इस अवसर पर राजदूत, जैन ल्यूक्स की पत्नी राका सिंह व राज्यपाल की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर भी उपस्थित थीं।
राज्यपाल ने कहा कि बेल्जियम की अर्थव्यवस्था, विशेषकर हीरे के व्यापार में भारतीय समुदाय का विशेष योगदान है। भारत लगभग 83.2 प्रतिशत कच्चा हीरा बेल्जियम से आयात करता है जिसकी पालिश भारत में होती है। इसी तरह भारत, देश में बने हुए आभूषण एवं जवाहरात जैसे कीमती पत्थर बेल्जियम को निर्यात करता है।
उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम का पुराना रिश्ता है। शीशे से बने सजावटी उत्पाद जैसे झाड़फानूस आदि, जो भारत में बेल्जियम ग्लास के नाम से मशहूर हैं, आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर इस क्षेत्र में व्यापार की अच्छी संभावनाएं तलाश सकते हैं।
नाईक ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार ने विदेशी निवेश के संबंध में कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। निवेश के क्षेत्र में बेल्जियम और भारत के बीच एक अच्छा और सौहाद्रपूर्ण वातावरण का निर्माण हो सकता है जो दोनों देश की जनता के हित में होगा। बेल्जियम एवं भारत के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, अवस्थापना विकास, निर्माण, नवीनीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, कौशल विकास व अन्य क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम में अनेक विख्यात उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान हैं। बेल्जियम के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में भारत के 600 से 800 तक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दोनों देशों के विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लाभ मिल सकता है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि निवेश के माध्यम से दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध और मजबूत होंगे।
बेल्जियम के राजदूत, ल्यूक्स ने राज्यपाल की बातों का समर्थन करते हुए पूरे सहयोग का भरोसा जताया। राज्यपाल ने ल्यूक्स को ऐतिहासिक रूमी गेट का चित्र व राजभवन की काफी टेबल बुक तोहफे के तौर पर भेंट की।
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