विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने विपक्ष के इस नोटिस को नियम 356 के तहत स्वीकार कर चर्चा कराने की स्वीकृति दे दी। लेकिन, आक्रोशित विपक्ष का हंगामा जारी रहा। खास बात यह है कि भाजपा विधायक सदन में की कार्यवाही शुरू होने से तीन मिनट पहले ही अपने विषयों को लेकर वेल में आ गए।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा और कांग्रेस विधायक भी वेल में आ गए और हंगामा शुरू कर दिया। वेल में पहले पहुंचने की होड़ से वंचित रही बसपा ने इस दौरान प्रदेश की ध्वस्त कानून व्यवस्था का मुद्दा बताते हुए अपने दल के सभी विधायकों के साथ सदन से बहिर्गमन कर गए।
विपक्ष को अपनी-अपनी सीटों पर जाने के पीठ के अनुरोध के बावजूद भाजपा और कांग्रेस वेल में जमे रहे। ऐसे में सदन को अव्यवस्थित देख विधानसभा अध्यक्ष ने 11.10 मिनट पर सदन की कार्यवाही 12.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान शामली और बुलंदशहर में पत्रकारों पर हमले का मामला भी उठा विपक्ष ने उठाया।
सदन की कार्यवाही जैसे ही 11 बजे शुरू हुई, वैसे ही वेल में पहले से मौजूद भाजपा विधायकों ने पंचायत चुनाव में हुई जबर्दस्त धांधली और प्रदेश की बिगड़ी कानून-व्यवस्था का हवाला देकर हंगामा करने लगे। भाजपा की इस पहल के साथ-साथ मुख्य विपक्षी दल बसपा और कांग्रेस के विधायक भी वेल में आकर हंगामा करने लगे।
विपक्षी दल सूबे की कानून-व्यवस्था पर विधानसभा की कार्यवाही रोककर नियम 311 के तहत उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे। पीठ से नियम 356 में चर्चा कराए जाने की मिली स्वीकृति के बावजूद विपक्षी हंगामा करते रहे।
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