मुस्लिम समाज परिषद ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी पर दोबारा वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनने के लिए जोड़-तोड़ किए जाने का आरोप लगाते हुए जुफर फारूकी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
परिषद का आरोप है कि फारूकी अपने दोस्तों को लाभान्वित करने के लिए विवादित वक्फ को दो भागों में विभाजित कर एक भाग पर वक्फ बोर्ड में कार्यरत अपने तीन चहेते कर्मचारियों को मुतावल्ली बनाते हैं। वहीं दूसरे भाग पर अपने दोस्तों को मुतावल्ली नियुक्त किया है।
परिषद के अध्यक्ष शुऐब ने आरोप लगाया कि सुन्नी बोर्ड के चेयरमैन ने अपने पिछले कार्यकाल में रहीमनगर, लखनऊ में स्थित मस्जिद की वक्फ सम्पत्ति संख्या-310 तथा पुराने लखनऊ के ख्वाजा काजिम अली वक्फ संख्या-63 के साथ वही कार्यवाही की थी। वक्फ 63 के विभाजन द्वारा उन्होंने अपने चहेते तीन कर्मचारियों को तथा अलहुदा एजुकेशनल सोसायटी के अध्यक्ष अतहर हुसैन, सिकेट्ररी डॉ. कौसर उस्मान तथा मैनेजर डॉ. शकील को मुतावल्ली बनाकर लाभान्वित किया है।
शुऐब ने सरकार से मांग की है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी को तत्काल निलंबित कर बोर्ड में व्याप्त घोटाले की जांच कराए और औकाफ की इस बंदरबांट पर रोक लगाए।
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