उर्दू शायरी का भारत-पाक मुशायरा 5 मार्च को

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। भारत और पाकिस्तान दोनों ही पड़ोसी देश एक मजबूत सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पृष्ठभूमि साझा करते हैं। दोनों देशों के बीच होने वाले कई कार्यक्रमों में से एक है डी.सी.एम. शंकर-शाद मुशायरा। इसकी शुरुआत 1953 में हुई थी। इस साल इसके 51वें संस्करण का आयोजन पांच मार्च को किया जा रहा है।

शंकर-शाद मुशायरा विश्व भर में उर्दू का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय मुशायरा रहा है और उर्दू शायरी प्रेमियों के बीच इसने अपनी अलग पहचान कायम की है।

इस वर्ष इस मुशायरे की रौनक बढ़ाने वाले शायरों में; पीरजदा कासिम (कराची), किश्वर नाहीद (इस्लामाबाद), अमजद इस्लाम अमजद (लाहौर), अजीज नबील (दोहा कटार), अब्दुल्ला साहिब (यू.एस.), और फरहत शहजाद (न्यू जर्सी, यू.एस) जैसे प्रख्यात कवियों के नाम शामिल हैं, वहीं भारतीय शायरों में; जावेद अख्तर (मुम्बई), अनवर जलालपुरी (लखनऊ), मुन्नवर राणा (लखनऊ), प्रो. वसीम बरेल्वी (बरेली), डॉ. पॉपुलर मेरठी (मेरठ), इकबाल अशर (दिल्ली), डॉ. गौहर रजा (दिल्ली), इफ्फत जरीन (दिल्ली), नवाज देवबंधी (देवबंध), कुंवर रंजीत चैहन (दिल्ली), डॉ. मलिकजदा मंजूर अहमद (लखनऊ) एवम् बेकल उत्साही (बलरामपुर) जैसी हस्तियां शामिल हैं जो अपने आप में उर्दू लिटरेचर क्षेत्र के दिग्गज और माने हुए व्यक्तित्व हैं।

अपने वार्षिक पर्व के विषय में माधव बी श्रीराम (अध्यक्ष, शंकर लाल-मुरली धर मेमोरियल सोसायटी और निदेशक, डीसीएम श्रीराम इंडस्ट्रीज लिमिटेड) बताते हैं, “दिल्ली की विख्यात व विविधता भरी जीवंत संस्कृति पर 500 वर्षो तक उर्दू भाषा का प्रभुत्व रहा है। मुझे लगता है कि उर्दू एक भाषा नहीं यह अपने आप में एक संस्कृति है। आज के समय में इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है, इस भाषा व संस्कृति को विलुप्त होने से बचाना होगा। हालिया वर्षो में साहित्यिक समारोह व गतिविधियों के चलते बड़े पैमाने पर भाषा के पुनरूद्धार की एक अच्छी पहल ने इस संस्कृति को जीवंत करने का प्रयास किया है और हमें खुशी है कि एक परम्परा को जीवित रखने के प्रयास में हम भी योगदान दे पा रहे हैं।”

दिल्ली के रत्न एवं डी.सी.एम. के संस्थापक लाला मुरलीधर शाद एवं शंकरलाल ने इस पहल की शुरुआत की थी। अपनी तरह के इस शंकर-शाद (भारत-पाक) मुशायरा को पूर्व प्रधानमंत्रियों पं जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जैसी देश की अग्रणी हस्तियों का भी संरक्षण मिला है। पूर्व में जोश मलिहाबादी, जिगर मोरादाबादी, फैज अहमद फैज, कैफी आजमी, अली सरदार जाफरी एवं अन्य प्रख्यात कवियों ने शंकर-शाद मुशायरा में अपनी कम्पोजिशन से विशिष्ट बनाया है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493