अलीगढ़, 25 अगस्त (आईएएनएस)। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) में चिकित्सकों ने चार घंटे लंबे चले ऑपरेशन में एक गंभीर जन्मजात बीमारी से पीड़ित सात महीने की बच्ची का सफलतापूर्वक इलाज किया। इससे बच्ची की जान को खतरा था।
चिकित्सकों ने कहा कि पूरे उत्तर भारत में केवल कुछ ही केंद्रों पर इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को किया जा सकता है।
अलीगढ़ के जवान क्षेत्र निवासी सलमान की बेटी माहिरा को टीम के अध्यक्ष कार्डियोथोरैसिक सर्जन मोहम्मद हनीफ बेग ने नया जीवन दिया। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के प्रतिकुलपति भी हैं।
चिकित्सकों ने शनिवार को कहा कि दरअसल बच्ची के हृदय कक्षों में से एक विकसित नहीं हुआ था और उसके दिल में एक छेद था, जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध और अशुद्ध रक्त का मिश्रण हुआ। उन्होंने कहा कि बच्ची का रंग बिगड़ रहा था, सांस जल्दी-जल्दी लेना पड़ रहा था और इसमें दिक्कत होती थी। इसके साथ ही उसे खाना खाने में भी समस्या हो रही थी।
चिकित्सकों ने कहा कि शुक्रवार को किए गए ऑपरेशन के बाद बच्ची के फेफड़े के जरिये सिर, गर्दन और बाहों में रक्त का संचार किया गया। अब लड़की को स्वस्थ जीवन जीने के लिए छुट्टी दे दी गई है।
एम.एच. बेग ने कहा कि यह सर्जरी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत मुफ्त की गई, जो कि राष्ट्रीय बाल मिशन के तहत सरकार की एक पहल है।
चिकित्सक आजम हसीन ने कहा कि जेएनएमसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बच्चों का जटिल हृदय संबंधी सर्जरी की सुविधा का एकमात्र केंद्र है।
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