एक बार फिर ‘कानपुर दक्षिण’ बनी सपा की धुरी

उत्तम हालांकि मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले हैं, पर राजनीतिक जीवन से कानपुर के दक्षिण में रह रहे हैं। जनता दल के समय से ही मुलायम सिंह कानपुर के दक्षिण में रहने वाले चौधरी हरमोहन सिंह पर विश्वास करते थे। यही नहीं, कानपुर के अलावा प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के मामलों में भी चौधरी की हनक रहती थी।

समाजवादी पार्टी के गठन से लेकर चौधरी के निधन तक कानपुर के आस-पास उन्हीं की मर्जी से टिकटों का वितरण किया जाता रहा है। एमएलसी नरेश उत्तम पटेल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर यह तय हो गया कि कानपुर में सपा की धुरी कानपुर दक्षिण ही रहेगी। यह अलग बात है कि इस बार पार्टी ने कुछ अधिक ही कानपुर दक्षिण पर विश्वास किया और कानपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में अब यहां की हनक रहेगी।

बताते चलें कि उत्तम फतेहपुर जनपद के जहानाबाद विधानसभा के लहुरी सरांय के रहने वाले हैं, और राजनीतिक जीवन की शुरुआत कानपुर में ही रहकर की। किराए से लेकर निजी आवास तक उनका कानपुर क्षेत्र के दक्षिण ही रहा।

कुर्मी बहुल है दोआबा : कानपुर से लेकर पूर्वांचल तक का दोआबा यानी गंगा-यमुना की धरती कुर्मी बहुल मानी जाती है। कानपुर में कटियार, सचान, फतेहपुर में वर्मा, उमराव, उत्तम, सिंगरौर, चंद्रौल, इलाहाबाद व मिर्जापुर में चंद्रौल, सिंगरौर, वाराणसी व मिर्जापुर में पटेल आदि नाम से कुर्मी जाने जाते हैं। माना जा रहा है कि दोआबा को मजबूत करने के लिए सीएम अखिलेश यादव ने नरेश उत्तम पर विश्वास किया है।

नेता जी के हैं करीबी : नरेश उत्तम साधारण किसान परिवार से आते हैं और राजनीतिक कैरियर की शुरुआत नेता जी (मुलायम सिंह यादव) के साथ रहकर किया। बताया जा रहा है कि उत्तम नेता जी के करीबियों में से एक रहे हैं, जिसके चलते वह सदैव एमएलसी से ही विधायक रहते रहे।

एक बार कैबिनेट में मंत्री तो सपा सरकार में लाल बत्ती उनकी बनी ही रहती है। इन सबके होने के बाद वह चर्चित नामों में कभी नहीं रहे, पहली बार जब प्रदेश उपाध्यक्ष बने तो सीएम अखिलेश यादव के हस्तक्षेप पर और अब प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद ही किया है।

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