न्यूयार्क, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा सोमवार को शिखर वार्ता में शामिल होंगे। यह इस साल दोनों नेताओं के बीच होने वाली तीसरी मुलाकात है। बातचीत में जलवायु परिवर्तन और द्विपक्षीय आर्थिक और रक्षा मुद्दों को प्राथमिकता मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
यह वार्ता भारत और अमेरिका के पहले रणनीतिक और व्यावसायिक संवाद के कुछ दिनों बाद ही हो रही है। संवाद में भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री जॉन कैरी ने किया था।
यह बातचीत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के व्हाइट हाउस आगमन के बाद हो रही है। ओबामा और जिनपिंग की मुलाकात अमेरिका की नाराजगी की खबरों के बीच हुई। नाराजगी की वजह अमेरिकी सरकारी संस्थाओं पर संदिग्ध चीनी साइबर हमलों को बताया जा रहा है। साथ ही चीन की दक्षिण चीन समुद्र की नीति से भी अमेरिका चिंतित है।
भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने हाल में कहा था कि भारत की शक्ल में अमेरिका को ‘बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक साझीदार’ मिला है। ओबामा की एशिया नीति जिस संतुलन की तलाश में है, उस संबंध में इस साझीदारी का काफी महत्व है। लेकिन, उन्होंने साफ कर दिया कि यह रणनीतिक भागीदारी निश्चित रूप से चीन के खिलाफ नहीं है।
वर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दोनों देशों का रुख समान नहीं है। लेकिन, दोनों देश जानते हैं कि भारत-अमेरिका सहयोग के बिना इस मामले में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकेगा।
मोदी-ओबामा वार्ता के बाद रक्षा क्षेत्र के बारे में कोई घोषणा हो सकती है। मोदी की यात्रा शुरू होने से पहले भारत ने कई अरब डालर के अमेरिकी बोइंग हेलीकाप्टरों की खरीद पर मुहर लगाई थी।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बन सकती है।
दोनों देश केन्या, मलावी और लाइबेरिया में नई तकनीक की मदद से फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच कारोबार 100 अरब डालर को पार कर चुका है। दोनों देश इसे बढ़ाकर 500 अरब डालर करना चाह रहे हैं।
dharmpath.com dharmpath