नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। पांच वर्षीय साधिक (बदला हुआ नाम) के दिल में जन्म से ही छेद था। दिहाड़ी मजदूर की इस बेटी के बचने के आसार बहुत कम थे, क्योंकि इलाज के लिए लाखों रुपये का खर्च उठाने की क्षमता उनके पास नहीं थी। लेकिन एचसीएफआई की पहल से इस बच्ची की ‘मेदांता द मेडिसिटी’ में सर्जरी हुई। साधिका की ही तरह मेदांता इस साल 63 बच्चों और 12 बालिगों का इलाज कर चुकी है।
यहां जारी एक बयान के अनुसार, पिछले दो साल में समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड के जरिए एचसीएफआई ने 500 जानें बचाई हैं। नेशनल हार्ट इंस्टीच्यूट भी इसमें सहयोगी है।
एक अध्ययन के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में हर रोज 19 लोग सीधे दिल के रोग की वजह से मौत के मुंह में चले जाते हैं। दिल की कुछ बीमारियों का इलाज किया जा सकता है और मौत को रोका जा सकता है, लेकिन हर कोई इलाज का खर्च नहीं उठा सकता।
ऑपरेशन की भारी कीमत देखते हुए युवतियों और औरतों के साथ इलाज के मामले में भेदभाव किया जाता है। इसी वजह से एचसीएफआई और ‘मेदांता द मेडिसिटी’ ने मिल कर ‘बालिका बचाओ मुहिम’ की शुरूआत पिछले साल हरियाणा में की थी। अब तक बचाई गई जानों में 50 प्रतिशत बालिकाएं शामिल हैं।
इस बारे में हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ के.के. अग्रवाल ने कहा “हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया देश में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में सहयोग के लिए वचनबद्ध है। इसी के तहत हमने समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की शुरूआत दो साल पहले की थी। अब तक हमने 500 लोगों की मदद की हैं।”
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