मेक्सिको सिटी/नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए इसके दो महत्वपूर्ण सदस्यों मेक्सिको और स्विट्जरलैंड से पुरजोर समर्थन मिलने के बाद भारत के राजनयिक प्रयास सफल होते दिख रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को मेक्सिको दौरे के दौरान मेक्सिको ने भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए समर्थन जताया। इस दौरान मेक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना निटो ने कहा कि उनका देश सकारात्मक और निर्णायक रूप से एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन करता है। मोदी ने इसके लिए राष्ट्रपति निटो को धन्यवाद दिया।
मोदी की छह जून को जेनेवा यात्रा के दौरान स्विट्जरलैंड ने भी इस मामले में भारत के प्रति अपना समर्थन जताया था।
इन दोनों देशों के सहयोग के साथ अमेरिका का भी एनएसजी मामले में पुरजोर समर्थन बना हुआ है। इससे एनएसजी में भारत की दावेदारी मजबूत होगी।
एनएसजी वैश्विक स्तर पर परमाणु व्यापार को नियमित करने वाली संस्था है।
एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर यह सहयोग सही समय में मिला है। नौ से 10 जून के दौरान जेनेवा में एनएसजी की बैठक के दौरान भारत के आवेदन पर विचार हो सकता है।
एनएसजी की अगली बैठक 24 जून को सियोल में होगी।
भारत एक अन्य महत्वपूर्ण बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण संगठन मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) का भी सदस्य बनने की कगार पर पहुंच गया है।
एमटीसीआर की सदस्यता एनएसजी में भारत के प्रवेश पर मुहर लगा सकती है।
भारत चार बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं एनएसजी, एमटीसीआर, वासेनार प्रबंधन और आस्ट्रेलिया समूह की सदस्यता की मांग करता रहा है। उच्च प्रौद्योगिकी और संवेदनशील सैन्य दोहरी प्रौद्योगिकी के लगभग सभी प्रमुख आपूर्तिकर्ता इनके सदस्य हैं।
भारत व अमेरिका के परमाणु सौदे पर भारत के मामले के चीन द्वारा समर्थन के बाद असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकियों तक पहुंच बनाने के लिए 2008 में एनएसजी ने भारत को विशेष छूट दी थी।
चीन एमटीसीआर का सदस्य नहीं है।
मोदी ने अपने यात्रा कार्यक्रम के आखिरी पलों में मेक्सिको और स्विट्जलैंड को शामिल किया था। पहले वह अफगानिस्तान, कतर और अमेरिका की ही यात्रा करने वाले थे।
भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने के लिए अमेरिका से भी समर्थन मिला है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान मंगलवार को अमेरिकी समर्थन को व्यक्त किया था।
भारत को पहले से ही एनएसजी के अन्य प्रमुख देशों, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन से समर्थन मिल चुका है।
भारत के एनएसजी का सदस्य बनने के लिए चीन अब भी राह का रोड़ा बना हुआ है। चीन कहता है कि भारत को समूह का सदस्य बनने के लिए एनपीटी (परमाणु अप्रसार संधि) पर हस्ताक्षर करने की जरूरत है।
भारत ने एनपीटी को भेदभावपूर्ण बताते हुए इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
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