नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। संकटग्रस्त यमन से भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत का ‘ऑपरेशन राहत’ अभियान शुक्रवार को खत्म हो गया। इस दौरान कुल 5,600 लोगों को बाहर निकाला गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस अभियान के जरिये 4,600 भारतीयों के अलावा 41 देशों के 960 लोगों को यमन से सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकाले जाने वालों में एक तीन दिन की बच्ची भी शामिल है, जिसे विमान से एक इन्क्यूबेटर में रखकर कोच्चि लाया गया।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया, “यमन से भारतीयों को बाहर निकालने का अभियान खत्म हो गया। जनरल वी.के.सिंह आज रात वापस लौट रहे हैं। हम यमन स्थित अपने दूतावास को बंद कर रहे हैं।”
इससे पहले, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने ट्वीट किया कि भारत ने यमन की राजधानी सना से 630 लोगों को एयर इंडिया के तीन विशेष विमानों से बाहर निकालने के साथ ही अभियान खत्म कर दिया है।
अकबरूद्दीन ने कहा कि अदन बंदरगाह पर गुरुवार को एक बम विस्फोट होने के बाद स्थिति फिर बिगड़ गई है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत ने सना से लोगों को विमान के जरिये बाहर निकालने का काम खत्म कर दिया है। अभियान की शुरुआत से लेकर अबतक 2,900 से अधिक लोगों को सना से 18 विशेष विमानों के जरिये बाहर निकाला गया।”
बयान के मुताबिक, “बीते 31 मार्च से लेकर अबतक भारतीय नौसेना के पोतों ने यमन के अदन, हुदायदाह तथा अल मुकाल्ला बंदरगाह से 1,670 से अधिक लोगों को बाहर निकाला। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुमित्रा ने नौ अप्रैल को अल हुदायदाह बंदरगाह से 349 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें 46 भारतीय, जबकि 303 विदेशी नागरिक थे।”
प्रवक्ता ने तीन दिन की एक बच्ची की तस्वीर भी ट्वीट की, जिसे यमन से निकालकर कोच्चि पहुंचाया गया।
उन्होंने लिखा, “यमन से सबसे कम उम्र के नागरिक को बाहर निकाला गया। इंक्यूबेटर में तीन दिन का एक बच्चा चिकित्सक के साथ एयर इंडिया के विमान से कोच्चि लौटते हुए।”
शुक्रवार सुबह वापस लौटे विदेश राज्य मंत्री वी.के.सिंह ने कहा कि मिशन यमन टीम वर्क तथा बेहतर समन्वय के कारण सफल रहा।
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करने हुए कहा कि एयर इंडिया, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना तथा विदेश मंत्रालय के बीच बढ़िया समन्वय रहा।
उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री ने यमन में एक कार्य सौंपा था, जिसे मैंने पूरा किया। लगभग 4,600 भारतीय तथा लगभग 1000 विदेशी नागरिकों को संकटग्रस्त यमन से बाहर निकाला गया।”
वहीं, यमन से शुक्रवार तक 382 केरलवासी कोच्चि पहुंच चुके हैं।
केरल के प्रवासी मामलों के मंत्री के.सी.जोसेफ ने संवाददाताओं को बताया कि उनकी गुरुवार को यमन के अस्पताल में सेवारत केरल की एक नर्स से बात हुई। नर्सो का कहना है कि वह भारत लौटना नहीं चाहतीं।
जोसेफ के मुताबिक, “नर्स ने मुझे बताया कि उनके अस्पताल में केरल की 64 नर्से काम करती हैं। काफी अनुनय के बावजूद उसने मुझसे कहा कि मुझे नर्सो पर वापस वतन लौटने के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए।”
उनके मुताबिक, “हम नियमित रूप से विदेश राज्यमंत्री वी.के.सिंह के साथ संपर्क में रहे हैं। वी.के.सिंह जिबूती में बचाव अभियान की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने हमें बताया कि जनवरी से ही यमन में मौजूद भारतीयों को वापस देश लौटने को कहा जा रहा है।”
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