यह विधेयक बुधवार को 67 के मुकाबले 98 मतों से पारित हुआ, जो सरकार को उन स्थितियों में आपातकाल की घोषणा की अनुमति देगा, जब प्रवासियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हो जाएगी। साथ ही यह सरकार को सीमा पर एक घंटे के भीतर शरण का दावा खारिज करने का अधिकार भी देता है।
विधेयक को संसद के निम्न सदन नेशनल काउंसिल ने पारित किया। कानून बनने के लिए इसे अगले सप्ताह फेडरल काउंसिल या उच्च सदन से पास होना होगा और इसके बाद इसे राष्ट्रपति तथा चांसलर के दस्तखत की आवश्यकता होगी।
ऑस्ट्रियाई समाचार पत्र ‘देर स्टैंडर्ड’ के मुताबिक, विधेयक का समर्थन मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टियों सोशल डेमोक्रेट्स (एसपीओ) तथा पीपुल्स पार्टी (ओवीपी) ने किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन ऑस्ट्रिया के लोगों का समर्थन पाने के लिए कड़े कानून ला रहा है, क्योंकि ‘ओपन डोर’ शरणार्थी नीति से ऑस्ट्रिया के लोग परेशान हैं।
ऑस्ट्रिया की धुर दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी (एफपीओ) ने राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में रविवार को अप्रत्याशित जीत दर्ज की है।
साल 1945 के बाद ऐसा पहली बार होगा, जब ऑस्ट्रिया अपने राष्ट्रपति का निर्वाचन ऑस्ट्रिया के चांसलर वर्नर फेमान की एसपीओ या उनके मध्य-मार्गी गठबंधन साझेदार ओवीपी के समर्थन के बिना करेगा।
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