नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मेडिकल के स्नातकेतर (अंडर ग्रेजुएट) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए ऑल इंडिया प्री-मेडिकल इन्ट्रेंस टेस्ट (एआईपीएमटी) की राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के आयोजन के लिए दायर एक लोकहित याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश सुरक्षित रखा। कहा गया कि यह राज्यों के उस निर्विवादित तथ्य को नहीं पेश करेगा, जैसा कि कहा गया था कि एनईईटी उन पर थोपा नहीं जा सकता, क्योंकि मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने की उनकी अपनी वैधानिक व्यवस्था है।
शुरुआत में ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अदालत को कहा कि वह दो चरणों में एनईईटी परीक्षा का आयोजन करेगा। इस साल पहला एक मई को और दूसरा 24 जुलाई को होगा।
परीक्षा का परिणाम 17 अगस्त को घोषित होगा। उसके बाद काउंसिलिंग और दाखिला होगा।
अदालत स्वयंसेवी संस्था संकल्प चैरिटबल ट्रस्ट की लोकहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसमें कहा गया है कि चूंकि देश भर में प्राधिकारी मेडिकल कालेजों में दाखिला के इच्छुक छात्रों के लिए एनईईटी का आयोजन नहीं कर रहे हैं, निजी मेडिकल कालेज छात्रों के दाखिले के लिए अपनी परीक्षा का आयोजन कर रहे हैं।
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