और अब आप पहनिए खादी के जूते..

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली में रविवार को युवा खादी ब्रांड को लांच किया गया। इस ब्रांड की खास बात यह है कि यह नए तरह से युवाओं तक पहुंचाएगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए युवा खादी ब्रांड के अंतर्गत पहली बार खादी के जूते लांच किए गए हैं।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली में रविवार को युवा खादी ब्रांड को लांच किया गया। इस ब्रांड की खास बात यह है कि यह नए तरह से युवाओं तक पहुंचाएगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए युवा खादी ब्रांड के अंतर्गत पहली बार खादी के जूते लांच किए गए हैं।

देश में पहली बार खादी के जूते हाथ से काते और सिले गए हैं। युवा खादी ब्रांड और खादी के जूते देश को एक नया नजरिया देंगे। इस मौके पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह, सांसद मनोज तिवारी, सांसद उदित राज, महंत आदित्य कृष्ण गिरि भी मौजूद थे।

खादी के जूते का अनावरण करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में एमएसएमई मंत्रालय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं लाया है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि खादी को बढ़ावा देने से घर घर में रोजगार पहुंचेगा।

वहीं सांसद मनोज तिवारी खादी के जूतों को देख काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि खादी की पहुंच घर घर तक है, चूंकि सूत महिलाएं कात लेती हैं इसलिए इसे बढावा देने से महिलाओं बच्चियों में भी रोजगार बढ़ेगा। खादी और स्वदेशी चीजों को युवा ही आगे बढ़ा सकते हैं, सरकार ने युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए कई योजनाएं पेश की हैं जिससे वो बैंको से लोन लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं। और कई लोगों को रोजगार भी दे सकते हैं।

युवा खादी के निदेशक और फाउंडर पीयूष प्रियदर्शी ने कहा कि अभी युवा खादी ब्रांड ने जूते लांच किए हैं, जिसकी कीमत 1000 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक है। हमने ये जूते युवा भारत को सोचकर डिजाइन किए हैं और हमें यकीन है कि हमारे युवा इस खादी के जूतों को खूब पसंद करेंगे, आगामी दिनों में युवा खादी ब्रांड के अंतर्गत महिलाओं के कपड़े और एसेसरीज को लांच करने की योजना है।

पीयूष ने बताया कि युवा खादी के अंतर्गत हमने गैर सरकारी संस्था धरोहर से भी हाथ मिलाया है और खादी के जूते, बैग, कपड़े और एसेसरीज के निर्माण में उनका अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद लोगों तक रोजगार पहुंचाना भी है और अभी हमारे यहां धरोहर के साथ मिलकर एक हजार महिलाएं और युवा कारीगर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारा मोटो है थिंक स्वदेशी बाई स्वदेशी।”

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