कई शहरों में पुलिस के छापे, 5 मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरफ्तार (राउंडअप)

पुणे/हैदराबाद, 28 अगस्त (आईएएनएस)। पुलिस ने महाराष्ट्र के कोरेगांव-भीमा दंगों के संबंध में मंगलवार को देश के अलग-अलग शहरों में छापे मारे और पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व कथित नक्सल समर्थकों को गिरफ्तार किया। इनमें वामपंथी विचारक वरवर राव भी शामिल हैं।

मुंबई, पुणे, गोवा, दिल्ली, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 10 जगहों पर छापे मारे गए।

पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त शिवाजीराव बोडखे ने आईएएनएस से कहा, “हमने वरवर राव, वेर्नोन गोंजाल्वेज, अरुण परेरा, सुधा भारद्वाज और गौतम नौलखा को गिरफ्तार किया है।”

इस साल एक जनवरी को हुए कोरेगांव-भीमा दंगा मामले में नक्सल समर्थकों की भागीदारी की जारी जांच के सिलसिले में मानवाधिकार कार्यकर्ता क्रांति, स्टेन स्वामी और आनंद तेलतुंबडे समेत कई अन्य के खिलाफ भी छापे मारे गए।

इस बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस को निर्देश दिया कि वह गौतम नौलखा को बुधवार तक दिल्ली से बाहर न ले जाए और अगले आदेश तक उन्हें उनके घर में नजरबंद रखे।

अदालत का यह निर्देश नौलखा के वकील द्वारा अपराह्न् में दिल्ली उच्च न्यायालय में उनके ठिकाने के बारे में जानने के लिए एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करने के बाद आया। पुलिस ने अदालत को बताया कि पुलिस को दंडाधिकारी से नौलखा की ट्रांजिट रिमांड मिल गई है।

मुंबई और ठाणे समेत कई स्थानों पर इन कार्यकर्ताओं के कई समर्थकों ने पुलिस छापों के दौरान प्रदर्शन किए।

इन गिरफ्तारियों का कई सामाजिक-मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व पूर्व नौकरशाहों ने विरोध किया है। एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल. रामदास, पूर्व नौकरशाह हर्ष मंदर, जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष शहला राशिद शोरा, पत्रकार प्रंजॉय गुहा ठाकुर, गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी, मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और स्वामी अग्निवेश ने संयुक्त बयान जारी कर गिरफ्तारी का विरोध किया है। इन लोगों ने कहा कि ये गिरफ्तारियां वंचितों के हक की लड़ाई लड़ने वालों में आतंक पैदा करने के लिए की गईं हैं।

भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि हाल में हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था पर हुई कार्रवाई के बाद यह सरकार द्वारा जनता को चुप करने का प्रयास है। लेकिन, गैर सरकारी संस्थाएं अब लोकतंत्र को बचाने के लिए भाजपा सरकार के खिलाफ और जोरशोर से संघर्ष करेंगी।

इन गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आरोप लगाया कि पुलिस भीमा-कोरेगांव दंगों के बाद दलित अधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को निशाना बना रही है।

पुलिस अधिकारियों ने इन छापों को 17 अप्रैल को की गई ऐसी ही कार्रवाई के आगे की कार्रवाई बताया है, जब पुणे पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा दलित कार्यकर्ताओं और कबीर कला मंच से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इन कार्यकर्ताओं ने 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में यलगार परिषद का आयोजन किया था।

अगले दिन एक जनवरी को कोरेगांव-भीमा में जातीय दंगे भड़क गए थे, जिसमें एक शख्स की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रकाश आंबेडकर की अध्यक्षता वाले भारिप-बहुजन महासंघ द्वारा तीन जनवरी को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया था।

करीब पांच महीने बाद आज (मंगलवार को) पुणे पुलिस की टीमों ने करीब आधा दर्जन राज्यों में कई लोगों के घरों और कार्यालयों पर छापेमारी की। इन लोगों पर यलगार परिषद के साथ संबंध रखने और नक्सल समर्थक होने का संदेह है।

पुलिस ने इनके पास से कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, दस्तावेज और किताबें जब्त की हैं और दावा किया है कि ये सभी नक्सलियों के लिए शहरी थिंकटैंक के रूप में कार्य कर रहे थे।

माओवादी विचारक वरवर राव को महाराष्ट्र पुलिस ने हैदराबाद में गिरफ्तार किया। पुणे पुलिस की टीम ने क्रांतिकारी लेखक राव के घर की आठ घंटे तलाशी ली। उन्हें अदालत में पेश किया गया, जिसने पुलिस को उन्हें बुधवार शाम पांच बजे तक पुणे की अदालत में पेश करने को कहा।

पुलिस ने राव के घर पर छापा मारने के साथ-साथ उनकी दो बेटियों, कुछ रिश्तेदारों और दो पत्रकारों समेत कुछ दोस्तों के घरों पर भी छापे मारे।

यहां गांधीनगर स्थित राव के घर पर उस समय हल्के तनाव की स्थिति बन गई, जब राव के समर्थक इकट्ठा होकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया था।

राव की पत्नी हेमलता ने संवाददाताओं को बताया कि पुलिस ने उन्हें बताया कि राव की गिरफ्तारी प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश के मामले के संदर्भ में की गई है।

हेमलता ने कहा कि सुबह करीब 20 की संख्या में पुलिसवाले बिना वारंट के पहुंचे और तलाशी शुरू कर दी। उन्होंने घर का कोना-कोना छान मारा। जब पुलिसवालों से गिरफ्तारी का वारंट दिखाने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि वारंट की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनके पति ने पुलिस से कहा कि यह मामला झूठा है।

पुणे पुलिस ने जून में कथित तौर पर पांच लोगों में से एक व्यक्ति के घर से मोदी की हत्या की साजिश के उल्लेख वाला एक पत्र बरामद किया था। इन पांचों लोगों को भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।

बरामद पत्र में कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की हत्या पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तर्ज पर करने की बात कही गई थी। इस पत्र को लिखने वाले व्यक्ति की पहचान सिर्फ ‘आर’ के रूप में की गई।

इसमें साजिश को अंजाम देने के लिए एक एम-4 राइफल व चार लाख चक्र कारतूस खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपये की जरूरत का जिक्र किया गया था। कहा जा रहा है कि इस पत्र में वरवर राव का नाम धन का इंतजाम करने वाले के रूप में शामिल है।

यह पत्र नक्सल नेता प्रकाश को संबोधित था और इसे मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना जैकब विल्सन के पास से बरामद किया गया था, जब उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था।

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