हैदराबाद, 25 नवंबर (आईएएनएस)। शोध और विकास पर लागू कर छूट समाप्त करने से देश में नवाचार गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह बात बुधवार को फार्मा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने कही।
कंपनी ने हालांकि कराधान कानूनों को सरल बनाने की कोशिश का स्वागत किया, लेकिन कहा कि आरएंडडी भारित कटौती (वेटेड डिडक्शन) हटाने का उल्टा असर होगा और देश में नवाचार के लिए चल रही कोशिशों पर नकारात्मक असर होगा।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने वैज्ञानिक शोधों के लिए किए गए निवेश पर कर छूट को वर्तमान 200 फीसदी से घटाकर 100 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है।
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के अध्यक्ष और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) सौमेन चक्रवर्ती ने कहा, “दुनियाभर के देश आरएंडडी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई आरएंडडी क्रेडिट, आरएंडडी भारित कटौती और पेटेंट बॉक्स जैसे कदम उठाते हैं। आरएंडडी भारित कटौती निश्चित रूप से जारी रहनी चाहिए, ताकि वैश्विक नवाचार बाजार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा में भारत में भी काम करने की समान परिस्थिति हासिल हो।”
उन्होंने कहा कि अगले चार साल में कॉरपोरेट कर को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करना और निवेश और लाभ से जुड़ी कटौतियों को समाप्त करना सही दिशा में उठाया गया कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार को विभिन्न चरणों में न्यूनतमक वैकल्पिक कर (एमएटी) भी हटाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के लिए 31 मार्च, 2017 से प्रभावी होने वाला सनसेट प्रावधान मेक इन इंडिया लक्ष्य के प्रतिकूल है। कंपनियों द्वारा किए जा रहे निवेश और एमएटी लागू किए जाने से सेज पर पड़े प्रभाव को देखते हुए सनसेट प्रावधान को कुछ और साल के लिए टाला जा सकता था।”
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