नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि दिवंगत राष्ट्रपति की जन्मभूमि रामेश्वरम में उनकी स्मृतियों को ताजा रखने के लिए स्मारक बनाया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने ऐसी नई खोज करने का आह्वान किया जिससे पूरी दुनिया को फायदा पहुंचे।
प्रधानमंत्री ने यहां डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) परिसर में डाक्टर कलाम की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद कहा, “कलाम साहब की जन्मभूमि में सरकार ने जमीन ली है। इस पर उनकी याद में स्मारक बनाया जाएगा। हमने वह जगह तय कर ली है जहां स्मारक बनेगा-जहां वह पैदा हुए-जहां उन्हें दफन किया गया, उसी गांव में-भावी पीढ़ी की प्रेरणा के लिए। मैंने स्मारक के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई है।”
मोदी ने डाक्टर कलाम की नई बातों को सीखने की चाह से प्रेरणा लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया में अपनी जगह बना रहा है। यहां नवोन्मेष के लिए बहुत गुंजाइश है। एक समय दुनिया भारत को बाजार के रूप में देखती थी। आज सहयात्री के रूप में देखती है। दुनिया का नजरिया बदल गया है। लेकिन क्या आर्थिक समृद्धि या सिर्फ बाजार हमें चलाएगा? हमारे यहां नई खोजों के लिए व्यापक गुंजाइश है।”
उन्होंने कहा, “कलाम साहब को याद करने का मतलब नवोन्मेष को बढ़ावा देना है..कि हम कलाम साहब को याद करते हुए दुनिया को क्या दे सकते हैं?”
मोदी ने कहा कि डीआरडीओ को युवा वैज्ञानिकों, विज्ञान की समझ-चाह रखने वालों, नई खोजों के प्रति जिज्ञासुओं, छात्रों के लिए सेमिनार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, आवास, नदियों को जोड़ने, अनाज की बरबादी रोकने और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नई खोजों की काफी जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “राष्ट्रपति पद से हटने के फौरन बाद डॉक्टर कलाम चेन्नई चले गए और वहां अध्यापन शुरू कर दिया।”
मोदी ने कहा, “और, जरा उनके आखिरी लम्हों को देखिए। कहां रामेश्वरम, कहां दिल्ली और कहां पूर्वोत्तर..इस उम्र में इन सभी जगहों पर उनका जाना और छात्रों के साथ समय बिताना उनकी प्रतिबद्धताओं को दिखाता है।”
मोदी ने कहा कि कलाम भारत के मानव संसाधन को उन्नत और परिष्कृत करना चाहते थे।
मोदी ने कहा, “भारत को शक्तिशाली होना चाहिए, लेकिन सिर्फ हथियारों में नहीं। यह कलाम साहब की सोच नहीं थी। हथियार की शक्ति जरूरी है, और उन्होंने इसमें योगदान भी दिया लेकिन उनका मानना था कि एक राष्ट्र की पहचान सीमाओं से नहीं बल्कि उसके लोगों से होती है।”
मोदी ने कहा, “इसीलिए उन्होंने दोनों काम, रक्षा शोध और मानव संसाधन को उन्नत करने को अपने हाथ में लिया।”
रामेश्वरम में पैदा हुए ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने भौतिकी और विमानन अभियांत्रिकी की पढ़ाई की थी। उन्होंने चार दशक तक वैज्ञानिक और विज्ञान प्रशासक की भूमिका निभाई। वह मुख्यत: डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से जुड़े रहे। देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइलों को बनाने में उनका काफी योगदान रहा।
कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति थे। वह 2002 से 2007 तक राष्ट्रपति पद पर रहे। इसी साल 27 जुलाई को उनका निधन हो गया।
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