श्रीनगर, 28 मई (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार रक्षक संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गुरुवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुसिल द्वारा गोली-बंदूक के इस्तेमाल पर सरकार को प्रतिबंध लगाना चाहिए।
एमनेस्टी ने एक बयान में कहा, “जम्मू एवं कश्मीर सरकार को प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा गोली-बंदूक का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे समय पर वे स्वभाविक रूप से गलत और अंधाधुंध गोलियां चलाते हैं।”
एमनेस्टी इंटरनेशल इंडिया के कार्यक्रम निदेशक शेमीर बाबू ने कहा, “राज्य में पुलिस कई सालों से गोली-बंदूक का इस्तेमाल करती आई है। कई मामलों में लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में 21 मई 2015 को जम्मू एवं कश्मीर में पलहलान में 16 वर्षीय हामिद नजीर भट्ट को पुलिस की गोली लगी थी। उसके एक आंख की रौशनी चली गई।”
शेमीर ने कहा, “पुलिस का दायित्व हिंसा और अपराध को रोकना और लोगों की रक्षा करना है। यद्यपि इस दायित्व का निभाने के क्रम में उन्हें जहां तक संभव हो अहिंसक उपाय अपनाने चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रदर्शनों के दौरान भी पुलिस को यह ध्यान में रखना चाहिए कि कौन हिंसक कदम उठा रहा है और कौन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है।”
उन्होंने कहा, “बल का प्रयोग सिर्फ उन लोगों के खिलाफ होना चाहिए, जो हिंसा कर रहे हों और पुलिस को देखना चाहिए कि हिंसक कार्रवाई में शामिल न होने वालों को चोट न पहुंचे।”
श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर सजाद खांडे ने एमनेस्टी को बताया कि बीते कुछ सालों में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाइयों में कई लोगों को गंभीर चोटें पहुंची हैं।
उन्होंने कहा, “आंख में गोली लगने से इंसान अंधा भी हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग में गोली-बंदूक का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। पुलिस का उद्देश्य लोगों को बिना नुकसान पहुंचाए अपना दायित्व निभाना होना चाहिए।
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