कांग्रेस सांसदों का संसद परिसर में प्रदर्शन (लीड-1)

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस के नेताओं और सांसदों ने अपनी पार्टी के 25 लोकसभा सदस्यों के निलंबन के खिलाफ बुधवार दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रखा। इस प्रदर्शन को छह अन्य राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया।

कुछ नेताओं ने अपनी बांह पर काली पट्टियां बांध रखी थी, जबकि कुछ ने हाथों में काले झंडे ले रखे थे।

जनता दल (युनाइटेड) के नेता शरद यादव और के.सी.त्यागी, समाजवादी पार्टी (सपा) के धर्मेद्र यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के जय प्रकाश नारायण यादव, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पी.करुणाकरण, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा) के डी.राजा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई.अहमद ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सोमवार को कांग्रेस सदस्यों को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया था। उनका कहना था कि ये जानबूझ कर सदन की कार्यवाही चलने नहीं दे रहे और सदन के नियमों का पालन करने के उनके अनुरोध पर ध्यान नहीं दे रहे।

सोनिया गांधी और अन्य नेताओं ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

उन्होंने ‘तानाशाही समाप्त करो’, ‘प्रधानमंत्री चुप्पी तोड़ो’, ‘अच्छे दिन कहां गए’, ‘सुषमा स्वराज इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाए।

सोनिया ने मीडिया से कहा, “हम गुरुवार को भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।”

उन्होंने कहा कि गतिरोध समाप्त करने या 25 सांसदों का निलंबन वापस लेने के संबंध में सरकार के किसी प्रस्ताव की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा, “हमें लोकसभा अध्यक्ष का फैसला पसंद नहीं, लेकिन हम उनके पद का सम्मान करते हैं।”

लोकसभा में पार्टी के सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि निलंबित सांसद लोकसभा अध्यक्ष से माफी नहीं मांगेंगे।

इस बीच, लोकसभा की कार्यवाही जब बुधवार पूर्वाह्न शुरू हुई, विपक्षी पार्टियों सपा, राजद और राकांपा ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और दलों ने खास मुद्दे उठाना चाहा।

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के अतिरिक्त अन्य विपक्षी पार्टियों तथा मुस्लिम लीग के सदस्य भी सदन में मौजूद नहीं थे।

सुमित्रा महाजन ने उनका अनुरोध सुनने से इंकार कर दिया, इस पर सभी तीनों दलों के सदस्यों ने सदन का बहिर्गमन किया।

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