इस्लामाबाद, 1 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तानी पंजाब के तत्कालीन गर्वनर सलमान तासीर की हत्या का खुद जुर्म कबूलने वाले अपराधी मुमताज कादरी को फांसी देने की जानकारी बेहद कम लोगों को थी।
कादरी एक इलीट कमांडो था और तासीर की सुरक्षा में तैनात था। उसे रावलपिंडी के अदैला जेल में सोमवार सुबह फांसी पर चढ़ा दिया गया।
4 जनवरी 2011 को इस्लामाबाद में कादरी ने तासीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी, क्योंकि तासीर ने ईशनिंदा के आरोपी का साथ दिया था। एक आतंकरोधी अदालत ने उसे मौत की सजा दी थी, जिसे इस्लामाबाद उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा।
रविवार रात तक फांसी पर चढ़ाए जाने के फैसले की जानकारी बहुत ही कम अधिकारियों को थी। जिन्हें ये जानकारी थी उन्हें सख्त ताकीद थी कि वे दूसरों को ना बताए। डॉन ऑनलाइन ने यह जानकारी दी है।
किसी परेशानी से बचने के लिए पुलिस और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने फांसी की योजना में अड़चन आने पर वैकल्पिक रणनीति भी तैयार की थी।
कादरी के 30 से ज्यादा परिवारवालों को देर रात जेल में उससे मिलने के लिए बुलाया गया। इनमें उसके पिता मोहम्मद शाबी, पत्नी और एक भाई शामिल थे।
जानकार सूत्रों ने बताया कि रविवार रात एक पुलिस दल उसके निवास स्थान पर परिवार वालों को लाने के लिए भेजा गया। उन्हें यह कह कर लाया गया कि कादरी बीमार है और उनसे मिलना चाहता है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हम कादरी की फांसी हो जाने से पहले इस योजना का खुलासा नहीं करने को लेकर प्रतिबद्ध थे।”
इसी प्रकार से अधिकारियों ने कादरी के शव को सादिकाबाद पहुंचाया और इस दौरान अपने वरिष्ठों से कोड वर्ड में ही बात की।
उन्होंने उसके शव को परिवारवालों के हवाले कर समझाया कि सड़कों पर प्रदर्शन करने में समय बरबाद करने की बजाय वे जल्द से जल्द शव को दफना दें।
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