इस्लामाबाद, 28 मार्च (आईएएनएस)। सैकड़ों इस्लामवादी लोग मुमताज कादरी की फांसी की निंदा करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के मुख्य भाग में घेराबंदी जारी रखे हुए हैं। पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल सलमान तसीर की हत्या के आरोप में कादरी को फांसी दी गई थी। तसीर की हत्या कथित ईशनिंदा के लिए की गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों से झड़प के बावजूद करीब 2000 इस्लामवादी प्रदर्शन स्थल से हटने को तैयार नहीं हुए। उनका कहना है कि जब तक शरिया कानून लागू करने सहित उनकी अन्य मांगें मान नहीं ली जातीं, तब तक इस्लामवादी घेराबंदी हटाने को तैयार नहीं हैं।
इस्लामाबाद के खतरे वाले वाले क्षेत्र में सेना के जवान तैनात किए गए हैं, ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हो जाए।
प्रदर्शनकारी मुमताज कादरी की फंसी की निंदा करने के साथ उसे शहीद घोषित करने की भी मांग कर रहे हैं।
सुन्नी तहरीक और पाकिस्तान के अन्य धार्मिक संगठनों के लोग रविवार से ही प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं।
रविवार को करीब दस हजार इस्लामवादी इस्लामाबाद के रेड जोन में इकट्ठे हुए। पुलिस और पाकिस्तान रेंजर्स के साथ उनकी झड़प हुई है। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों के सुरक्षा घेरे में भी आग लगा दी। इसके बाद यहां सेना बुलानी पड़ी।
पाकिस्तान के अखबार दी न्यूज इंटरनेशनल के अनुसार, प्रदर्शनकारी संसद भवन से 700 मीटर की दूरी पर घेरा डाले हुए हैं। जब भीड़ इकट्ठी होने लगी तो पुलिस ने आंसूगैस के गोले भी छोड़े।
रविवार को प्रदर्शनकारियों ने कराची प्रेस क्लब पर भी हमला किया और वहां पत्रकारों की पिटाई भी की। प्रदर्शनकारी इस बात को लेकर नाराज थे कि मीडिया ने उनके प्रदर्शन को पर्याप्त कवर नहीं किया।
जमीयत उलेमा-ए-पाकिस्तान (नूरानी) के छात्र संगठन अंजुमन तलबा-ए-इस्लाम (एटीआई) ने चेहल्लुम की पूर्व संध्या पर रविवार को प्रदर्शन किया।
पुलिस और चश्मदीदों के अनुसार, पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहने हुए दर्जनों उत्तेजित एटीआई कार्यकर्ता प्रेस क्लब पहुंचे।
कैमरामैन के साथ गरमागरम बहस के बाद प्रदर्शनकारियों ने वहां खड़े वाहन की खिड़की के शीशे तोड़ने लगे और उसमें आग लगा दी। वाहन एक निजी टीवी चैनल का था।
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