जयपुर, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। जयपुर का 250 साल पुराना रत्न और आभूषण उद्योग इन दिनों दक्ष कारीगरों की कमी से जूझ रहा है।
जयपुर, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। जयपुर का 250 साल पुराना रत्न और आभूषण उद्योग इन दिनों दक्ष कारीगरों की कमी से जूझ रहा है।
जयपुर का यह उद्योग सालाना 2,200-2,400 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात करता है। इस उद्योग के दक्ष कारीगरों की संख्या में हालांकि गिरावट दर्ज की गई है। कुछ साल पहले कारीगरों की संख्या 2,50,000-3,00,000 हुआ करती थी, जो अब घटकर 1,25,000-1,50,000 रह गई है।
एक स्थानीय आभूषण निर्माता जितेंद्र सिंह हादा ने आईएएनएस से कहा, “2009-2010 में उद्योग में मंदी आने के बाद कामगारों की संख्या घटी है। कारोबारी इकाइयों ने कुछ कारीगरों की छंटनी कर दी। बाजार में तेजी आने के बाद भी वे कामगार अब तक नहीं लौटे हैं, क्योंकि उन्हें दूसरे क्षेत्रों में नौकरी मिल गई है।”
एक अन्य कारोबारी ने कहा, “दक्ष कामगारों को ढूंढ़ना एक बड़ा सिरदर्द है। इससे हमारा कारोबार प्रभावित हो रहा है।”
कामगारों को प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों के मुताबिक, रत्नाभूषण उद्योग आम तौर पर पारंपरिक तरीकों से पारिवारिक कारोबार के रूप में चलाया जा रहा है।
एक कामगार इकराम ने आईएएनएस से कहा, “युवाओं के पास आज नौकरी के लिए अधिक विकल्प हो गए हैं। इसलिए वे पारंपरिक क्षेत्र में काम नहीं करना चहते हैं, जहां आगे बढ़ने की अधिक संभावना नहीं है।”
उन्होंने कहा, “एक दक्ष कामगार औसत 12,000-15,000 रुपये प्रति माह कमा लेता है, जो एक परिवार चलाने के लिए काफी नहीं है। इसलिए मैं अपने बच्चों को दूसरे क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित करता हूं।”
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वैलरी (आईआईजीजे) ने पूरे राज्य में कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान कौशल एवं जीविका विकास निगम (आरएसएलडीसी) के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है।
आईआईजीजे के मानद सचिव विजय चोरडिया ने आईएएनएस से कहा, “एंप्लायमेंट लिंक्ड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम (ईएलएसटीपी) नामक कार्यक्रम का मकसद 2015-16 में 3,600 प्रशिक्षुओं को दक्ष बनाना है।”
जयपुर 18वीं सदी से रत्नाभूषण उद्योग के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। साथ ही जयपुर का रत्नाभूषण उद्योग दुनियाभर में कटे हुए और पॉलिश किए हुए पóो का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
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