नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी (आप) की रैली में किसान की खुदकुशी की घटना की गूंज गुरुवार को लोकसभा में भी सुनाई दी। विभिन्न पार्टियों ने लोगों की मौजूदगी में किसान को आत्महत्या से न रोक पाने पर सवाल उठाया और इसको लेकर दिखाई गई असंवेदनशीलता पर अफसोस जाहिर किया।
कांग्रेस नीत विपक्षी पार्टियों ने कर्ज माफी और खराब मौसम की मार झेलने वाले किसानों को तत्काल मुआवजा दिए जाने की मांग की।
राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर में बुधवार को पेड़ में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “जब घटना घटित हो रही थी, उस समय किसी ने उसे क्यों नहीं रोका? क्यों पुलिस ने कुछ नहीं किया? क्यों नेताओं ने अपना भाषण जारी रखा? इसके अलावा असंवेदनशील भाषणों पर आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा, “हम सभी पहले इंसान हैं। हम सभी को आत्मनिरीक्षण की जरूरत है। जब वह खुद को फंदे पर टांग रहा था, कुछ लोग तालियां बजा रहे थे।”
हुड्डा ने कहा कि दूसरा मुद्दा किसान की दशा है। सरकार को तत्काल किसानों को मुआवजा और बोनस दिए जाने की घोषणा करनी चाहिए। साथ ही ऋण माफी योजना पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री से इस घटना पर बयान जारी करने की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस सांसद स्वागत रॉय ने कहा, “मुझे किसान की आत्महत्या पर दुख और गुस्सा आ रहा है। इससे दो बातें निकलकर सामने आई हैं। पहली यह कि हमारा समाज कितना असंवेदनशील है और दूसरा कि किस तरह हमारे किसान दिक्कतें झेल रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “गृहमंत्री को न्यायिक जांच के आदेश देने चाहिए कि क्यों किसी ने कुछ नहीं किया और सबके सामने यह होता रहा।”
रॉय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसान की आत्महत्या के बावजूद आप की रैली चलती रही। यह अत्यंत निर्दयी रवैया है।
उन्होंने कहा, “इसने हमारी व्यवस्था की रुग्नता को छिपाया है कि जब आपदा आती है, हमारी सरकार टीम भेजती है और रिपोर्ट पेश की जाती है। कई किसान शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला। मैं एक सुस्पष्ट बयान चाहूंगा कि कब वे इन किसानों को पूरा मुआवजा देंगे।”
तृणमूल के नेता ने कहा, “प्रधानमंत्री को ट्विटर की जगह घर से बाहर निकल कर देश की हालात पर बयान देना चाहिए।”
इधर, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा, “यह सिर्फ सरकार का सवाल नहीं है, बल्कि हम सभी का है। हमने ऋण माफ किया है और सिंचाई व्यवस्था मुफ्त दी गई है। हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि कोई किसान आत्महत्या न करे।”
आप नेता भगवंत मान ने कहा, “गजेंद्र व्यवस्था से दुखी था। मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। कई राज्यों ने किसानों की आत्महत्या के आंकड़े को छुपाया है। सभी सरकारों को साथ आकर किसानों के लिए कुछ करना चाहिए।”
इससे पहले, विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही करीब 40 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
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