कोलकाता, 28 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति तैयार करने की प्रक्रिया न ‘पारदर्शी’ और न ही ‘समावेशी’ है। यह बात सामाजिक कार्यकर्ता अंबरीश राय ने कही।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) मंच के राष्ट्रीय संयोजक अंबरीश ने कहा, “हम शिक्षा नीति को दोबारा बनाने की पहल का स्वागत करते हैं, लेकिन इसके तरीके का समर्थन नहीं करते। इसकी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।”
यह मंच 18 राज्यों में संचालित 10,000 संगठनों का नेटवर्क है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में कहा था कि नई शिक्षा नीति राज्यों के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद तैयार की जाएगी।
अंबरीश ने कहा कि सरकार ने जहां नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लक्ष्य को लेकर सलाह मशविरे के लिए साल की शुरुआत में अपनी गतिविधियां तेज कर दी थीं, वहीं अब तक कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “वे इसे दिसंबर तक बनाना चाहते थे, लेकिन जमीनी स्तर पर सलाह-मशविरा या बैठकें कहां हुई हैं? केंद्र को सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों के बारे में नहीं सभी हितधारकों के बारे में विचार करना चाहिए? इसकी नीतियां समावेशी नहीं हैं।”
अंबरीश कहते हैं कि लोगों के समक्ष नए ढांचे के नियम एवं शर्तो को स्पष्ट रूप से पेश नहीं किया गया है।
उन्होंने ये बातें 12 गैर सरकारी संगठनों की तरफ से शनिवार को आयोजित कार्यशाला के दौरान कहीं। ये संगठन पश्चिम बंगाल में आरटीई को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
गैर सरकारी संगठन ‘एसपीएएन’ द्वारा आयोजित यूथ स्टैंड फॉर आरटीई-सॉलिडरिटी बिल्डिंग वर्कशॉप राज्य में आरटीई लागू करने संबंधी जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से युवाओं को एकजुट करने के लिए तैयार किया गया था।
dharmpath.com dharmpath