केंद्र में धन्नासेठों की सरकार : मायावती

मायावती ने संसद में मोदी सरकार के विपक्षी दलों के साथ रवैये से लोकतंत्र के कमजोर पड़ने की बात भी कही है। बसपा मुखिया ने मोदी सरकार को पूंजीपतियों व धन्नासेठों व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इशारों पर चलने वाली सरकार करार दिया है।

बसपा अध्यक्ष मायावती ने आईपीएन से बातचीत में कहा, “सत्ताधारी दल भाजपा व सरकार में बैठे उसके शीर्ष नेतृत्व ने अपने ऊपर ‘ललितमोदीगेट’ व ‘व्यापम खूनी महाघोटाला’ के संबंध में देश की वाजिब चिंताओं व भ्रष्टाचार के संबंध में सटीक तर्को के आधार पर लोगों को संतुष्ट करने की अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।

उन्होंने कहा कि ललितमोदीगेट व व्यापम खूनी महाघोटाले के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी को देश की जनता ‘सत्ता का अहंकार’ मानती है।

उन्होंने कहा कि सैनिकों के संबंध में ‘वन रैंक वन पेंशन’ का कानून बन जाने के बावजूद उसे लागू नहीं कर मोदी सरकार ने इस बारे में भी चुनावी वादा अभी तक नहीं निभाया। इस संबंध में केंद्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में बार-बार फटकार व अवमानना भी झेलनी पड़ रही है। कुल मिलाकर यह वादाखिलाफी करने वाली सरकार साबित हो रही है।

जीएसटी को देशहित में न बताते हुए उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार का यह तर्क भी सही नहीं है कि नया संशोधित भूमि अधिग्रहण कानून व जीएसटी के बिना देश का विकास अवरुद्ध हो रहा है, क्योंकि वर्ष 1998 से वर्ष 2009 के दौरान 11 वर्षो तक इन दोनों ही कानूनों के बिना ही भारत ने साढ़े 8 प्रतिशत की विकास दर से तरक्की की थी।

मायावती ने कहा कि देश के समस्त गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों को खासतौर से और दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों को आमतौर से यह समझ लेना चाहिए कि भाजपा व नरेंद्र मोदी की सरकार केवल बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों व आरएसएस के ही इशारों पर चलने वाली सरकार है। इनके अलावा यह सरकार किसी की भी होने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि केवल इन्हीं मुठ्ठीभर लोगों को लाभ पहुंचाने वाली नीति व कार्यक्रमों को लागू करने में यह सरकार पूरी जी-जान से लगी हुई है और इनके लिए ही नए-नए कानून व नियम बनाती जा रही है।

मायावती ने नई दिल्ली की प्रमुख सड़कों में से एक ‘औरंगजेब रोड’ का नाम बदलकर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर किए जाने के फैसले को गलत परंपरा की शुरुआत बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि मुगल शासक औरंगजेब व भारतरत्न अब्दुल कलाम दोनों ही अपने-अपने समय में खास महत्व रखने वाली शख्यित हंै और ऐसे एक व्यक्ति के नाम को हटाकर दूसरे व्यक्ति के नाम पर सड़क का नामकरण करना संकीर्ण मानसिकता को प्रदर्शित करता है व इससे देश की बदनामी भी होती है।

मायावती ने कहा कि अब्दुल कलाम के नाम पर किसी नई सड़क या किसी दूसरी सड़क का नामकरण किया जाना चाहिए और औरंगजेब रोड का नाम फिर से बहाल कर दिया जाना चाहिए, यही उचित होगा।

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