केंद्र, हज समिति से दिव्यांग अधिकार पर जवाब तलब

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार और हज समिति से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें हाल ही में जारी हज दिशानिर्देशों(2018-22) में कथित रूप से दिव्यांग लोगों को मक्का जाने से रोकने के नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और भारतीय हज समिति को मामले की अगली सुनवाई के दिन 11 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

याचिका वकील गौरव कुमार बंसल ने दायर की है, जिसमें वर्ष 2018 से 2022 के बीच हज समिति के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, दिव्यांग लोगों को हज पर जाने से प्रतिबंधित किया गया है।

वकील ने कहा कि 27 नवंबर, 2017 को जारी नए दिशानिर्देश ‘भेदभावपूर्ण, मनमाने ढंग से और बहुत ही तर्कहीन’ हैं, क्योंकि यह दिव्यांगों के मूलभूत अधिकारों का और दिव्यांग अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडीए) 2016 का उल्लंघन करते हैं।

दिशानिर्देशों के अनुसार, “कोई भारतीय, जो मुस्लिम है वह तीर्थयात्रा के लिए आवेदन दायर कर सकता है, सिवाय उनके जो “पोलियो, क्षयरोग, हृदय रोग, श्वसन विकार, एड्स, कुष्ठ रोग, एक्यूट कोरोनरी इनसिफिसिएंसी, कोरोनरी घनास्त्रता, मानसिक विकार से ग्रस्त हैं।”

इसके साथ ही वे व्यक्ति भी तीर्थयात्रा के लिए आवेदन नहीं कर सकते ‘जो विकलांग हैं, मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं या किसी अन्य प्रकार से शारीरिक एवं मानसिक रूप से अक्षम हैं।’

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