तिरुवनंतपुरम, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के हिंदुओं ने बुधवार तड़के मंदिरों में प्रार्थना के साथ पारंपरिक तरीके से अपने नववर्ष की शुरुआत के रूप में विशु का जश्न मनाया।
महिलाएं केरल की पारंपरिक साड़ी और पुरुष पारंपरिक धोती पहनकर मंदिरों में पूजा के लिए गए। सबरीमाला, श्रीकृष्ण मंदिर गुरुवयूर और श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर जैसे मशहूर मंदिरों में सर्वाधिक भीड़ दिखी।
विशु त्यौहार आने वाले साल में सौभाग्य के आगमन के लिए मनाया जाता है। इस मौके पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश रहता है।
बुधवार को त्यौहार का बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम ‘विशुकनी दर्शन’ यानी पसंदीदा देवता का दर्शन करना है।
हिंदू समुदाय के लोग विशुकनी के लिए रात से ही तैयारियां शुरू कर देते हैं। जिसमें ‘उरली’ (एक खास पोत) की सफाई की जाती है और खेतों के नए उत्पाद एकत्र किए जाते हैं।
देवता के सामने चावल, अनाज, ककड़ी, कद्दू, नारियल, केले और सुपारी चढ़ाई जाती है। ये सभी चीजें घर के पूजा घर में रखी जाती हैं। पूजा घर को पीले रंग के कोना फूलों से सजाया जाता है।
इस साल पूजा के लिए रेडीमेड किटें 50 रुपये से लेकर 150 रुपये तक में उपलब्ध हैं।
इस दिन युवा और वृद्ध लोग आंखों पर पट्टी बांधकर विशुकनी के सामने आते हैं और दिन में सबसे पहले देवता के ही दर्शन करते हैं।
इसके बाद का महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘विशुकैनीतम’ है, जिसमें सदस्यों को उपहार स्वरूप सिक्के दिए जाते हैं, ये सिक्के सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं।
विशु का अगला महत्वपूर्ण कार्यक्रम केले के पत्ते पर भोजन करना है। मध्य और दक्षिणी केरल के जिलों में इस भोज में शुद्ध शाकाहारी भोजन खाया जाता है, जबकि उत्तरी जिलों में इसमें मांसाहारी भोजन भी शामिल होता है।
राज्य के उत्तरी जिलों में इस मौके पर पटाखे जलाने की भी परंपरा है, जबकि शेष हिस्सों में ऐसी कोई परंपरा नहीं है।
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