तिरुवनंतपुरम, 28 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के बार घोटाले में राज्य के आबकारी मंत्री के. बाबू को गुरुवार को उस वक्त बड़ी राहत मिली जब केरल उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें उनके खिलाफ रिश्वतखोरी का मामला दर्ज करने के लिए कहा गया था।
बाबू पर आरोप है कि उन्होंने बार को चलाने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। बार के मालिक बीजू रमेश ने यह आरोप लगाया है। सतर्कता विभाग ने मामले की सत्यापन रपट दर्ज करने के लिए एक महीने का समय मांगा था। इस पर त्रिशूर की सतर्कता अदालत ने उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद 23 जनवरी को बाबू ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री ओमान चांडी को सौंप दिया था लेकिन मुख्यमंत्री ने अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर कर राज्यपाल को नहीं सौंपा है।
सतर्कता अदालत के आदेश के खिलाफ बाबू ने याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टी.ओबैद ने सतर्कता अदालत के आदेश को दो महीने तक निलंबित रखने का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा कि निचली अदालत इस मामले में काफी जल्दी में लग रही थी क्योंकि इस मामले की सुनवाई तो उच्च न्यायालय में भी अभी चल रही है।
लेकिन, उच्च न्यायालय ने सतर्कता जांच दल को त्वरित सत्यापन की कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय का आदेश सुनने के बाद गुरुवार को बाबू रो पड़े और उन्होंने भगवान को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “ईश्वर महान है। आज का दिन खास है, सिर्फ मेरे लिए ही नहीं। बहरहाल, मैं अपने इस्तीफे के फैसले को नहीं बदलूंगा। मैं अब अपने वरिष्ठ नेताओं से बात करूंगा।”
खुश नजर आ रहे मुख्यमंत्री चांडी ने मल्लापुरम में संवाददाताओं से कहा, “बाबू के खिलाफ मामले पर रोक लग गई है।” उनसे पूछा गया था कि वह बाबू का इस्तीफा राज्यपाल को क्यों नहीं भेज रहे हैं।
बाबू का कहना है कि उनके खिलाफ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और बीजू रमेश ने साजिश रची है। रमेश के राज्य की राजधानी में नौ बार हैं।
बार घोटाला अक्टूबर 2014 में सामने आया था। बीजू रमेश ने आरोप लगाया था कि राज्य के तत्कालीन वित्त मंत्री के.एम.मणि को राज्य में बंद पड़े 418 बारों को फिर से खोलने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई है।
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