केरल विधानसभा से विपक्ष का बहिर्गमन

तिरुवनंतपुरम, 8 जून (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को वामपंथी विपक्ष बार घोटाला मामले पर बहिर्गमन कर गया।

बार घोटाला अक्टूबर 2014 में उस वक्त प्रकाश में आया था, जब व्हिसल ब्लोअर तथा बार मालिक बीजू रमेश ने खुलासा किया था कि वित्त मंत्री के.एम.मणि को 418 बारों को बंद करने के लिए एक करोड़ रुपये रिश्वत दी गई थी।

इसी साल मार्च महीने में एक दंडाधिकारी को बताया गया था कि आबकारी मंत्री के.बाबू को बार लाइसेंस की वार्षिक रूप से बढ़ाई गई शुल्क घटाने के लिए 10 करोड़ रुपये दिए गए।

विपक्ष के नेता वी.एस.अच्युतानंदन ने बहिर्गमन से पहले कहा कि मौजूदा ओमन चांडी सरकार बेहद खराब है।

अच्युतानंदन ने कहा, “यह सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। सरकार जो भी कदम उठाती है, उसमें भ्रष्टाचार होता है। सारे सबूत मौजूद हैं। दो मंत्री मणि और बाबू भ्रष्टाचार संबंधी सौदे में शामिल थे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई अबतक नहीं की गई है। उनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल नहीं किए गए हैं।”

इससे पहले माकपा के राज्य सचिव कोडियारी बालकृष्णन ने सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ कदम उठाने के लिए सरकार की विफलता पर स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता ने कहा, “सभी सबूत इन दो भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ हैं। एक गवाह का लाइ डिटेक्टर से परीक्षण किया गया और यह पुष्ट है कि मणि को धनराशि दी गई। अगर मणि लाइ डिटेक्टर परीक्षण कराते हैं तो हम यह मुद्दा दोबारा नहीं उठाएंगे। चांडी सरकार जानती है कि यह मणि को बचने का रास्ता दे देगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह सरकार गिर जाएगी।”

बालकृष्णन ने कहा, “चांडी मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच से भाग रही है। जांच अधिकारी जांच से निकल चुके हैं। कई महीने के बाद आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। सारे बिंदु बताते हैं कि जांच से बचा जा रहा है।”

राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने हालांकि कहा कि बार घोटाले में इससे बेहतर कोई निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती।

चेन्निथला ने कहा, “यह सच्चाई है कि राज्य के दो मंत्रियों के खिलाफ जांच ने सरकार की मंशा और निष्पक्षता जाहिर की है। जब जांच पूरी होगी, तो इसके नतीजे सामने आएंगे।”

मणि और बाबू ने किसी भी तरह की गलती से इंकार किया है और कहा कि इसमें छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है। लेकिन पूरा विपक्ष बहिर्गमन कर गया, लेकिन सदन के शेष सूचीबद्ध कार्य के लिए कुछ देर बाद वापस लौट आया।

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