अमेरिका के विदेशमंत्री ने तीनों विज्ञप्तियों को अपनी नीति के आधार स्तंभ के तौर पर पुष्टि की, वन-चाइना पॉलिसी को बरकरार रखा और जलडमरूमध्य पार वार्ता को उत्साहित किया।
तीनों विज्ञप्तियों पर हस्ताक्षर 1972, 1978 तथा 1982 में किए गए, जो दोनों देशों के बीच संबंधों के आधार को दर्शाता है। अमेरिकी सरकार ने वन-चाइना पॉलिसी का समर्थन करने और ताइवान की स्वतंत्रता को समर्थन न करने का वादा किया।
वांग यी ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों में ताइवान एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अमेरिका को वन-चाइना पॉलिसी का पालन करना चाहिए।
वांग ने कहा, “ताइवान में क्या बदलाव हुआ है, यह मायने नहीं रखता। आधारभूत तथ्य यह है कि चीन व ताइवान दोनों वन चाइना का हिस्सा है, जिसमें कोई बदलाव नहीं होगा।”
वांग ने सन् 1972 में हुई आम सहमति तथा ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध एक महत्वपूर्ण शर्त है तथा शांतिपूर्ण जलडमरूमध्य पार संबंधों के विकास का राजनीतिक आधार है।
उन्होंने अमेरिका से चीन-ताइवान के बीच शांतिपूर्ण संबंधों के समर्थन की अपील की।
जॉन केरी मंगलवार से बुधवार तक बीजिंग के दो दिवसीय दौरे पर हैं।
dharmpath.com dharmpath