नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। पेपर मिलों द्वारा पिछले एक महीने में क्राफ्ट पेपर का भाव निरंतर बढ़ाए जाने से कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग में भारी नुकसान आ गया है। क्राफ्ट मिलें हर महीने की निश्चित तारीखों को अपने प्लांट बंद रखती हैं, इससे कच्ची सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होती है। इंडियन कोरगेटेड केस मैनुफक्च र्स एसोसिएशन (आईसीसीएमए) ने यह जानकारी देते हुए अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने की मांग की है।
आईसीसीएमए के अध्यक्ष किरीट मोदी ने कहा कि पश्चिम जोन की क्राफ्ट पेपर मिलों ने 27 से 31 जनवरी 2017 तक बंद रखा था और दूसरा बंद 11 से 15 फरवरी 2017 रखा था। अब 11 से 15 मार्च 2017 तक मिले बंद रहेंगी। पश्चिम जोन के साथ साथ दूसरे जोनों में भी पेपर मिलें बंद रहेगी। साउथ जोन के मिलों ने 11 से 15 फरवरी 2017 तक अपनी मिलें बंद रखी थी। नार्थ जोन की मिलें 1 से 5 मार्च 2017 को बंद रहेंगी।
मोदी ने कहा, “भारत में कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग की 300 से अधिक आटोमेटिक यूनिट और 12,000 से अधिक सेमी-ऑटोमेटिक यूनिटें हैं। इस उद्योग में 6 लाख कामगार हैं जो प्रति वर्ष 51 लाख टन बॉक्स का उत्पादन करते हैं तथा यह 18,000 हजार करोड़ रुपये का सालाना बाजार है, जो आम जनता की पैकेजिंग की जरूरतों को पूरा करते हुआ यह पर्यावरण का भी ख्याल रखता है। यह उद्योग 100 प्रतिशत पर्यावरण के अनुकूल है।”
इंडियन कोरगेटेड केस मैनुफक्च र्स एसोसिएशन 170 आटोमेटिक बोर्ड प्लांटों का प्रतिनिधित्व करती है। वेस्टर्न इंडिया कोरगेटेड मैनुफक्च र्स एसोसिएशन पश्चिम जोन की इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती है, उसके 413 सदस्य हैं। इन दोनों संस्थानों का कहना है कि कच्ची सामग्री के भाव वृद्धि को ग्राहकों पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। इसलिए भाव में 12 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की है।
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