समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, वैज्ञानिकों की धारणा थी कि यह प्राणी पहले भली-भांति पनप रहे थे, लेकिन 66 लाख साल पहले आए व्यापक क्षुद्रग्रह प्रभाव (आकाशीय पिंडों के बीच का टकराव) ने इन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया।
इस शोध में ब्रिटिश अध्यनकर्ताओं ने पाया कि डायनासोर की प्रजातियां वास्तव में क्षुद्रग्रह के प्रभाव से पहले ही विलुप्त होने लगी थीं।
ब्रिटेन में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग से इस अध्ययन के नेतृत्वकर्ता मानाबू साकामोतो ने बताया, “हमने इस परिणाम की उम्मीद नहीं की थी, क्योंकि क्षुद्रग्रह प्रभाव को ही डायनासोर के विलुप्त होने का कारण माना जा रहा था।”
इस शोध में यह भी पता चला है कि लंबी गर्दन वाले विशालकाय सोरोपोड डायनासोर सबसे तेजी से विलुप्त हो रहे थे। वहीं थेरोपोड समूह के डायनोसोर अधिक मंद गति से कम हो रहे थे।
यह शोध सोमवार को ‘यूएस जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
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