न्यूयार्क, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। मीडिया में आई एक रपट से यह जानकारी मिली है कि भिन्न लिंग वाले अभिभावकों के साथ पलने वाले बच्चों की भांति ही समान लिंग वाले अभिभावकों के साथ पलने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में कोई अंतर नहीं होता।
वेबसाइट ‘मिक डॉट कॉम’ की रपट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पाया है कि पति या पत्नी या साथी के संबंधों, माता-पिता और बच्चे के रिश्ते, बच्चों के सामान्य स्वास्थ्य, भावनात्मक कठिनाइयों, व्यवहार के संदर्भ में भिन्न लिंग वाले अभिभावकों के घरों और समान लिंग वाले अभिभावकों के घरों में कोई अंतर नहीं होता।
अमेरिका के विलियम्स इंस्टीट्यूट के लेखक हैनी बॉस ने कहा, “यह पहला ऐसा शोध है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर किए गए सर्वेक्षण का उपयोग किया गया है। इसमें उन दो प्रकार के घरों की तुलना की गई, जिनमें सतत संबंध रखने वाले अभिभावक रहते हैं।”
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने शिक्षा, स्थान के तर्ज पर 95 भिन्न लिंग वाले और 95 समान लिंग वाले अभिभावकों के परिवारों का विश्लेषण किया है।
इस शोध के परिणामों से इन दोनों घरों में पलने वाले बच्चों में किसी भी प्रकार का कोई अंतर नजर नहीं आया है।
सह-लेखिका नानेथे गाट्रेल ने कहा, “हालांकि, इस शोध में यह भी पाया गया है कि भिन्न लिंग वाले अभिभावकों की तुलना में समान लिंग वाले अभिभावक अधिक तनावग्रस्त होते हैं, लेकिन यह समान लिंग वाले अभिभावकों के घरों में पलने वाले बच्चों के प्रति सांस्कृतिक नजरिए का परिणाम भी हो सकता है।”
गाट्रेल ने कहा, “हमारे पूर्व के शोधों में यह सामने आया है कि लेस्बियन माताओं को उनके यौन अभिविन्यास की वजह से बच्चों के लालन-पालन की उनकी गुणवत्ता को साबित करने में काफी अधिक दबाव महसूस होता है।”
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