खजुराहो (मध्यप्रदेश), 3 दिसंबर, (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के खजुराहो में दो दिवसीय राष्ट्रीय जल सम्मेलन के दूसरे दिन जल संरचनाओं की स्थिति पर चिंता जताई गई, साथ ही एक प्रस्ताव पारित कर जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए राज्यस्तरीय कार्यबल बनाने की राज्य सरकार से मांग की गई।
जल-जन जोड़ो अभियान द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में जल संकट को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। अंत में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और जलपुरुष राजेंद्र सिंह की मौजूदगी में सर्व सम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया।
जल-जन जोड़ो अभियान के संयोजक संजय सिंह ने प्रस्ताव के बारे में कहा, “जल संरक्षकों का मानना है कि बुंदेलखंड के चंदेलकालीन और उसके बाद निर्मित हुई जल संरचनाओं की सूची बनाई जाए, और सरकार इसका तकनीकी स्तर पर परीक्षण करे।”
प्रस्ताव के अनुसार, “सभी जल संरचनाओं की मरम्मत कराई जाए, पुनर्निमाण की कार्ययोजना बनाई जाए, बुंदेलखंड के सभी जिलों में जल संरक्षण, संवर्धन और जल संरचनाओं का अध्ययन तकनीकी दलों द्वारा किया जाए। इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठनों, समुदाय को मिलाकर एक कार्यबल बनाया जाए, जो नई संरचनाओं का अध्ययन करने वाले दल की निगरानी करे।”
पर्यावरण प्रेमियों ने जल संरचनाओं में दूषित सामग्री के मिलने पर चिंता जताई। साथ ही सरकार से मांग की कि वह जल संरचनाओं को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सख्त कानून बनाए। इसके अलावा जल संरक्षण, जल उपयोग के लिए अधिनियम बनाया जाए।
इस प्रस्ताव में विभिन्न परियोजनाओं के कारण वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने और उसी अनुपात में पौधारोपण करने की मांग की गई है।
सम्मेलन में देश भर के विभिन्न हिस्सों से जल विशेषज्ञों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।
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