गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का उद्बोधन-न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हमारी विरासत का हिस्सा

नई दिल्ली-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने अपनी स्पीच की शुरुआत देश को बधाई देकर की। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो हमारी सामाजिक अस्मिता का मूल आधार है। राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हमारी विरासत का हिस्सा है।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि इस वर्ष, हम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मना रहे हैं। वे ऐसे अग्रणी स्वाधीनता सेनानियों में शामिल हैं जिनकी भूमिका को राष्ट्रीय इतिहास के संदर्भ में अब समुचित महत्व दिया जा रहा है। हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ हमारा जुड़ाव और अधिक गहरा हुआ है। इस समय आयोजित हो रहे प्रयागराज महाकुंभ को उस समृद्ध विरासत की प्रभावी अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। हमारी परंपराओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित करने और उनमें नई ऊर्जा का संचार करने के लिए संस्कृति के क्षेत्र में अनेक उत्साह-जनक प्रयास किए जा रहे हैं।

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