एफएओ के सहायक महानिदेशक जोमो ने गरीबी मिटाने में चीन की नीति के अंधानुकरण पर सावधान किया।
जोमो ने हालांकि गरीबी दूर करने में चीन की सफलता की सराहना की।
उन्होंने कहा, “चीन में गरीबों की संख्या 1990 के 75 करोड़ से घटकर 2014 में 20 करोड़ रह गई है, जबकि इस बीच चीन की आबादी 1.14 अरब से बढ़कर 1.36 अरब हो गई है।”
उन्होंने कहा कि चीन का स्कूल भोजन कार्यक्रम सराहनीय था। इससे कई क्षेत्र गरीबी से बाहर निकले, बच्चों को स्वस्थ्य और संतुलित भोजन मिला और किसानों की उपज के लिए मांग पैदा हुई।
मलेशियाई अर्थशास्त्री ने हालांकि कहा कि गरीबी दूर करने में चीन की रणनीति संभव है दूसरे देशों के लिए सही नहीं हो।
जोमो ने कहा, “चीन ने देहातों से विकास परियोजना शुरू की। उसका वहां से प्रसार किया और समय के साथ इसका चौमुखी असर हुआ।”
जोमो ने कहा, “चीन में यह कारगर रहा, जहां गरीबों और अमीरों के बीच खाई शुरू में कम थी, लेकिन विकास के साथ यह खाई बढ़ी है।”
उन्होंने कहा, “लेकिन दूसरे देश में यह बड़ी समस्या हो सकती है, जहां पहले से गरीबों और अमीरों के बीच बड़ी खाई है।”
उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के लिए वहां के परिवेश के उपयुक्त अलग-अलग नीति चाहिए।
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