गोदावरी व क्षिप्रा को करें प्रदूषण मुक्त : देवतीर्थ

लखनऊ /इलाहाबाद, 22 जनवरी (आईएएनएस)। तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले से अब गोदावरी और क्षिप्रा नदियों को भी नासिक व उज्जैन कुंभ से पहले प्रदूषण मुक्त करने की मांग उठने लगी है। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने इस संबंध में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है।

जगद्गुरु ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले के दौरान शुद्ध गंगाजल न मिलने से साधु-संतों व श्रद्धालुओं में काफी असंतोष रहा। ऐसे में नासिक और उज्जैन में आयोजित होने वाले कुंभ से पहले वहां की गोदावरी व क्षिप्रा नदियों को प्रदूषण मुक्त करना जरूरी है।

शंकराचार्य ने पत्र में केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती के उस बयान का भी जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने में ‘अभी 10 साल और’ लगेंगे। उमा भारती हाल ही में एक कार्यक्रम में भाग लेने माघ मेला आई थीं।

स्वामी अधोक्षजानंद ने नरेंद्र मोदी को लिखा है कि देश के श्रद्धालुओं की आस्था पर सरकार को भी गंभीर होना चाहिए। अगले 15 माह में दो कुंभ आयोजित हो रहे हैं। इसका ध्यान रखा जाए। पहला कुंभ गोदावरी के किनारे नासिक में इसी साल जुलाई-अगस्त में और दूसरा क्षिप्रा के तट पर उज्जैन में अगले साल अप्रैल-मई में है।

पत्र में यह भी लिखा गया है कि कुंभ सनातन धर्म के सबसे बड़े महापर्व हैं। इनका मुख्य आर्कषण पवित्र नदियां हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश वर्तमान में गोदावरी और क्षिप्रा दोनों नदियों की हालात बहुत ही दयनीय है। ऐसे में इन दोनों नदियों की स्वच्छता को लेकर केंद्र सरकार की क्या योजना है? क्या वहां भी संत व श्रद्धालु निराश होंगे या उन्हें आचमन व स्नान के लिए शुद्ध जल उपलब्ध नहीं हो पाएगा?

शंकराचार्य चाहते हैं कि गोदावरी और क्षिप्रा दोनों नदियां कुंभ से पहले स्वच्छ हो जाएं। उन्होंने लिखा है कि इस दिशा में सरकार द्वारा जो प्रयास किए जाएं उसकी जानकारी श्रद्धालुओं को और उन्हें भी दी जाए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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