नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या विभाग के अनुमानों के अनुसार भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की आबादी 2050 तक बढ़कर 19 प्रतिशत हो जाएगी। घरेलू स्वास्थ्य सेवाएं स्वस्थ भारत की ओर योगदान करने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हाल ही में होम हेल्थकेयर ने बुजुर्गों की देखभाल के लिए नजरिए में बदलाव किया है।
स्वास्थ्य देखरेख में सक्रिय नेटहेल्थ के महासचिव अंजन बोस ने कहा, “अगले दशक में घरेलू हेल्थकेयर का चलन सर्वाधिक होगा। हालांकि इस क्षेत्र में काम करने के लिए कुशल नर्स और संबंधित अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को ढूंढना बड़ी चुनौती है। अस्पताल के कर्मचारियों को भी कुशल बनाने की भी जरूरत है। चिकित्सा पेशेवरों को घर में एक सहयोगी माहौल बनाने की आवश्यकता होती है जहां समस्याएं व्यावसायिक रूप से हल की जाएं। इसके अलावा होम केयर के लिए बीमा कवरेज का उपलब्ध न होना एक मजबूत इकोसिस्टम के लिए बाधा है।”
उन्होंने कहा, ‘अब सरकार का मुख्य ध्यान आयुष्मान भारत मिशन के तहत स्वास्थ्य बीमा पर है, इसलिए, तेजी से बढ़ने और कवरेज के दायरे को बढ़ाने के लिए इस मौके पर पूंजीकरण करने हेतु बीमाकर्ताओं के लिए यह उचित समय है।’
तकनीक और मजबूत उपभोक्ता की मांग होम हेल्थकेयर का बाजार चला रही है। यह क्षेत्र हेल्थकेयर एग्रीगेटर्स, डॉक्टर डिस्कवरी प्लेटफार्मों और होम हेल्थकेयर सेवाओं की पेशकश करने वाले स्टार्ट-अप से भरा हुआ है। कई कंपनियों ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू, हैदराबाद और अन्य छोटे शहरों सहित प्रमुख भारतीय शहरों में होम हेल्थकेयर सेवाओं की स्थापना की है। होमकेयर सेवाएं मुख्य रूप से बुजुर्गो की देखभाल, कीमोथेरेपी, पुनर्वास, फिजियोथेरेपी और डायलिसिस की मांग पर सेवाएं देती हैं।
‘हेल्थ केयर ऐट होम इंडिया’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और नेटहेल्थ के सदस्य विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि बढ़ती मांग और इस क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तुरंत एक योजना तैयार करने की जरूरत है जो गुणवत्ता (मान्यता), आपूर्ति, बीमा, कौशल, तकनीक और विनियमों के साथ अन्य चीजों से संबंधित मुद्दों को उठाएगी।
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