नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। चमड़ा और जूता उद्योग के क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने के मकसद से केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक विशेष पैकेज को मंजूरी दी, जिसके तहत वर्ष 2017-20 के लिए 2600 करोड़ रुपये की लागत से केंद्रीय योजना ‘इंडियन फुटवियर, लेदर और ऐसेसरीज डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएफएलएडीपी)’ का कार्यान्वयन शामिल है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस योजना का लक्ष्य चमड़ा उद्योग के लिए आधारभूत सुविधाओं का विकास करना, चमड़ा उद्योग से जुड़ी पर्यावरण संबंधी चिंताओं का समाधान करना, अतिरिक्त निवेश को आसान बनाना, रोजगार सृजन करना और उत्पादन बढ़ाना है।
मंत्रालय ने कहा कि कर प्रोत्साहनों में वृद्धि होने से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होंगे और श्रम कानून में सुधार होने से इस क्षेत्र से अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़ेगा।
मंत्रालय ने कहा, “आईएफएलएडीपी के तहत तमिलनाडु में चमड़ा उद्योग को प्रमुखता देते हुए औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग द्वारा 117.33 करोड़ रुपये की कुल लागत से चार परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, ताकि आधारभूत सुविधाओं का उन्नयन होने के साथ-साथ रोजगार सृजन हो और पर्यावरण की स्थिति में सतत सुधार हो।”
तमिलनाडु मंजूर की गई परियोजनाओं में त्रिची में ताला त्रिची कॉमन एफ्लूएंट ट्रिटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का उन्नयन, नागलकेनी क्रोमपेट में पल्लावरम सीईटीपी, रानीपेट में सिडको फेज-1 सीईटीपी और इरोड में पेरुंदुरई लेदर इंडस्ट्रीज इको सिक्युरिटी प्राइवेट लिमिटेड शामिल है।
मंत्रालय ने कहा कि उद्योग नीति और संवर्धन विभाग ने पश्चिम बंगाल के बनातला में एक बड़े लेदर कलस्टर के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिससे लगभग 7000 लोगों को रोजगार मिलेगा और 400 से 500 करोड़ रुपये का निवेश संभव होगा ।
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