सिंगापुर, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने रविवार को कहा कि श्रीलंका भविष्य में चीनी पनडुब्बियों को अपने यहां आने देगा लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि इनका आना बहुत जल्दी-जल्दी नहीं होना चाहिए।
स्ट्रेट टाइम्स के साथ एक मुलाकात में विक्रमसिंघे ने कहा, “हमने युद्धपोतों की यात्रा के लिए कुछ शर्ते लगाई हैं। इनके तहत रहकर सभी देशों की पनडुब्बियां और पोत श्रीलंका आ सकते हैं। अगर यह एक दोस्ताना यात्रा है तो हम इस बारे में पड़ोसी देशों को बताएंगे।”
विक्रमसिंघे ने कहा, “पिछली बार चीनी पनडुब्बियों के आने के मामले में दिक्कत यह हुई थी कि भारत का कहना है कि उसे इस बारे में बताया नहीं गया था। अभी तक हमने जो पता लगाया है, उसके हिसाब से यह सही लग रहा है।”
विक्रमसिंघे चार दिन की यात्रा पर सिंगापुर आए हुए हैं। वह प्रधानमंत्री ली सीन लूंग से भी मिलेंगे।
पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की चीन से बढ़ती नजदीकियों ने भारत को नाराज कर दिया था। बीते साल चीनी नौसेना की पनडुब्बियों के श्रीलंका में रुकने को भारत-श्रीलंका संबंध के लिए आग में घी डालने वाला माना गया था।
विक्रमसिंघे ने कहा, “हमने भारत को अपनी नीतियों के बारे में बता दिया है। हमारे बीच समझौता है कि कोई भी देश दूसरे के सुरक्षा हितों को ठेस पहुंचाने वाला कोई काम नहीं करेगा। इस दायरे में रहते हुए हम अपना काम करते रहेंगे।”
भारत से संबंध पर सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ये सुधर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने भारत को बता दिया है कि चीन से हमारे लंबे संबंध रहे हैं। श्रीलंका में चीनी निवेश का स्वागत है।
उन्होंने भारत को सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता देने की मांग का समर्थन किया।
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