‘चाइना एंड अमेरिका : स्टे फोक्स्ड ऑन व्हाट रियली मैटर्स’ शीर्षक के तहत लिखे गए इस लेख में कहा गया, “यह सहयोग सिर्फ सद्भावना पर आधारित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के मूलभूत हितों और विश्व के प्रति उनके साझा उत्तरदायित्वों पर भी आधारित है।”
कूई ने इस साल जुलाई में सूचना प्रौद्योगिकी समझौते (आईटीए) के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लगभग दो दशकों में विश्व व्यापार संगठन में पहला शुल्क रियायत समझौता है। इस सौदे की वजह से प्रतिवर्ष बिना शुल्क के लगभग 1300 अरब डॉलर मूल्य का आईटी व्यापार होगा, जिससे दुनियाभर के कई कारोबारों, कामगारों और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचेगा।
राजदूत ने कहा कि यह समझौता गत वर्ष नवंबर में चीन और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बिना संभव नहीं हो पाता।
राजदूत ने कहा कि चीन और अमेरिका के लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि व्यापार नियम कौन बनाता है, बल्कि दोनों देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि किस तरह से इन व्यापार नियमों का खाका तैयार किया जाए, जिससे अन्य देशों के साथ संयुक्त रूप से खुले, पारदर्शी और नियम आधारित आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिल सके ताकि सभी को लाभ पहुंच सके।
चीनी राजदूत के मुताबिक, चीन और अमेरिका दोनों के लिए जलवायु परिवर्तन का मिलकर सामना करना प्राथमिकता है। दोनों देशों ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के िलए कड़े कदम उठाए हैं और ये 2015 में पेरिस में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में व्यापक और संतुलित नतीजों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दोनों देशों का विश्वास है कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती से आर्थिक विकास में बाधा नहीं पहुंचेगी बल्कि अधिक रोजगारों और अवसरों को सृजन होगा और दोनों देशों के बीच अधिक व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
dharmpath.com dharmpath