इस विद्यालय में 1990 के दशक के उत्तरार्ध में 300 बच्चे और 11 अध्यापक हुआ करते थे, लेकिन गांव के निवासियों के काम के सिलसिले में शहर जाने के कारण इस विद्यालय में बच्चों की संख्या कम होती गई। दरअसल, कमाई के सिलसिले में शहरों का रुख करने वाले साथ में बच्चों को भी ले गए, जिससे यहां के स्कूल में पढ़ने वालों की संख्या में निरंतर गिरावट आती गई।
इस समय चीन की कुल आबादी का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा यानी 75 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं, जिनमें से लगभग 25 करोड़ वे लोग हैं, जो गांवों से शहर आए हैं।
गांवों से शहरों की ओर पलायन से ग्रामीण चीन की स्थ्िित में बड़ा बदलाव आया है और गुआजियाझू गांव का प्राथमिक विद्यालय भी इसी का उदाहरण है।
वर्ष 2013 के शुरुआती महीनों में यहां केवल 13 छात्र रह गए थे और शरद सेमेस्टर शुरू होने तक तो यहां केवल चार छात्र रह गए थे। वे सभी अलग-अलग वर्गो के थे, लेकिन उन्हें एक ही कक्षा में बिठाया जाता था।
बेहतर शिक्षा और जीवन के लिए लोग गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिसके कारण इस गांव के विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी होती रही और 2014 में यह बंद हो गया।
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