फिच की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 और 2017 में सालाना नई क्षमता लगभग 1.6 करोड़ टन के आसपास रह सकती है। हालांकि अगले पांच साल में संयंत्रों के बंद होने की वजह से इसकी भरपाई हो सकती है।
देश के शीर्ष आर्थिक योजनाकार के आंकड़ों के मुताबिक, पहली तीन तिमाहियों में कच्चे इस्पात का उत्पादन सालाना आधार पर 2.1 प्रतिशत घटकर 60.89 करोड़ टन हो सकता है। फिच का मानना है कि चीन में भावी क्षमता में कटौती बाजार नियमनों की वजह से नहीं बल्कि बाजार कारकों की वजह से होगी।
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