जैतखाम की असाधारण ऊंचाई को ध्यान में रखकर इसके डिजाइन को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-रूड़की के तकनीकी विशेषज्ञों से अनुमोदित करवाया गया था। यह जैतखाम वायुदाब और भूकम्परोधी है। इसमें आग और आसमानी बिजली से बचाव के लिए उच्च तकनीकी प्रावधान भी किए गए हैं।
जैतखाम की बुनियाद का व्यास 60 मीटर है। इसके आधार तल पर लगभग दो हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था है और एक विशाल सभागृह का निर्माण भी किया गया है।
पहली मंजिल से आखिरी मंजिल तक सात बालकनियां भी बनाई गई हैं, जिनमें प्रवेश करने वाले लोग आस-पास के सुंदर प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन कर सकेंगे और सबसे ऊंची मंजिल तक बढ़ते हुए कुछ देर के लिए विश्राम भी कर सकेंगे।
जैतखाम में नीचे-ऊपर आने-जाने के लिए स्पायरल सीढ़ियों का भी निर्माण किया गया है। इसके अलावा वृद्धजनों, नि:शक्तजनों, बच्चों और महिलाओं की सुविधा के लिए विशेष रूप से लिफ्ट भी बनाए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के महान संत और सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरु बाबा घासीदास की जयंती के अवसर पर 18 दिसंबर को उनकी जन्मभूमि और तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में जैतखाम के समीप ध्वजारोहण भी किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मुख्य आतिथ्य और विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में धर्म गुरुओं के अलावा राज्य सरकार के सभी मंत्री, राज्य के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
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