कांग्रेस सदस्य मोतीराम देवांगन के मूल प्रश्न का जवाब देते हुए गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा, “कंपनी के 124 डायरेक्टर, 59 पदाधिकारी व 192 एजेंट को गिरफ्तार किया गया है। न्यायालय के दिशा-निर्देश के अनुसार पैसों की वसूली होगी।”
इस पर पूरक प्रश्न मोतीलाल देवांगन ने किया, जिसके जवाब में पैकरा ने कहा, “प्रदेश में बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है। इस पर पूरक प्रश्न के रूप में देवांगन ने गृहमंत्री से पूछा कि मुख्यमंत्री ने पूर्व में सदन में घोषणा की थी कि इस मामले में स्पेशल सेल बनाकर कार्रवाई की जाएगी।”
यहां सेल का गठन किया गया है कि नहीं और कितने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई? इस पर गृहमंत्री ने कहा कि मामले में बड़ी कंपनियों के लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वसूली की कार्रवाई न्यायालयीन प्रकरण के अनुसार होगी।
देवागंन ने कहा कि अभी तक 25 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार मालिकों का धरपकड़ क्यों नहीं कर रही है? इस पर मंत्री ने कहा कि न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से वसूली होगी।
गृहमंत्री से प्राप्त उत्तरों से नाखुश कांग्रेस के पाटन विधायक भूपेश बघेल ने पूरक प्रश्न करते हुए कहा, “इस मामले में एक साल पहले ही सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आया है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार पालन क्यों नहीं कर रही?” इस पर गृहमंत्री ने इसे न्यायालयीन प्रक्रिया के अंतर्गत रखा। गृहमंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेसी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
गृहमंत्री रामसेवक पैकरा देवांगन के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने कहा, “पीड़ित निवेशकों की राशि लौटाने की तिथि बताना संभव नहीं है। यह न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत है। अनियमित वित्तीय कार्य करने वाली कंपनियों के खिलाफ शासन द्वारा विशेष कार्य योजना बनाई गई है। हितों का संरक्षण अधिनियम 2005, नियम-2015 लागू किया गया है। आम नागरिकों में जागरूकता लाने तथा शिकायत के लिए शासन द्वारा वेबसाइट बनाई गई है।”
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