उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अपनी लेखनी से तत्कालीन समाज में राष्ट्रीय चेतना जागृत की और विभिन्न प्रकार की सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ जनजागरण का ऐतिहासिक कार्य किया।
उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने 1918 में ‘सेवासदन’, 1922 में ‘प्रेमाश्रम’, 1925 में ‘रंगभूमि’, 1932 में ‘कर्मभूमि’ और 1936 में ‘गोदान’ जैसे कालजई उपन्यासों की रचना की।
मुख्यमंत्री ने साहित्य सम्राट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हिन्दी भाषा और साहित्य को समृद्ध बनाने के लिए प्रेमचंद के योगदान को युगों-युगों तक याद रखा जाएगा।
प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास ग्राम लमही में और निधन 8 अक्टूबर 1936 को वाराणसी में हुआ था।
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