छग : लाउडस्पीकर, डीजे के मनमाना इस्तेमाल पर रोक

रायपुर, 29 दिसंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अत्यधिक शोर मचाने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों यानी लाउडस्पीकर तथा डीजे का मनमाना इस्तेमाल अब नहीं हो सकेगा। राज्य सरकार ने ध्वनि प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया है। इस सिलसिले में आवास और पर्यावरण विभाग ने मंत्रालय (महानदी भवन) से राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी किया है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह द्वारा जारी परिपत्र में जिला कलेक्टरों को जिलों में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के लिए एक शिकायत केंद्र की स्थापना करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें प्रत्येक केंद्र में एक जिम्मेदार अधिकारी तैनात करने और प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के लिए भी कहा गया है।

जिला कलेक्टरों को जिले में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए दंडाधिकारियों, पुलिस और होम गार्ड के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग और पेट्रोलिंग करने तथा नियम का पालन सुनिश्चित करवाने और ध्वनि प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार के जरिए जन-जागरण के लिए भी कहा गया है।

परिपत्र में बताया गया है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 अधिसूचित किए गए हैं। ये नियम 14 फरवरी 2000 से प्रभावशील हैं।

नियमों से संबंधित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करवाने के लिए उप पुलिस अधीक्षक श्रेणी के अधिकारी को विहित प्राधिकारी बनाया गया है। नियम-8 के प्रावधान में विहित प्राधिकारी को किसी लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, हॉर्न, निर्माण उपकरणों और अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों आदि को प्रतिबंधित करने की शक्तियां दी गई हैं।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह ने परिपत्र में कहा है कि राज्य शासन के ध्यान में यह तथ्य आया है कि ध्वनि विस्तारक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण परिवेशीय वायु में निर्धारित ध्वनि स्तर के मानकों को उल्लंघन हो रहा है और बढ़ता ध्वनि प्रदूषण जन-साधारण के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याओं का कारण भी बन रहा है।

परिपत्र के अनुसार, राज्य शासन को यह समाधान हो गया है कि प्रदेश की परिवेशीय वायु में निर्धारित ध्वनि स्तर के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रमुख सचिव सिंह ने परिपत्र में यह भी निर्देश दिए हैं कि इस नियम के प्रावधानों के अनुसार, लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग जिला दंडाधिकारी या अन्य सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जाए।

रात दस बजे से सवेरे छह बजे के बीच खुले में लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरण, संगीत उपकरण, ध्वनि विस्तारक यंत्र, ड्रम या टॉम-टॉम अथवा ट्रमपैट, पीटने या ध्वनि उत्पन्न करने वाले किसी भी उपकरण के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाए।

परिपत्र में यह भी कहा गया है कि ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों के अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाए कि जिस सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर, पब्लिक एडेज्ेस सिस्टम या अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले स्त्रोत का उपयोग हो रहा है तो उसकी सीमा पर ध्वनि स्तर निर्धारित परिवेशीय ध्वनि स्तर की सीमा से दस डी.बी. (ए) अथवा 75 डी.बी. (ए), जो भी कम हो, उससे अधिक नहीं होना चाहिए।

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