परिचर्चा में औषधीय पौधों की खेती के जानकार वैज्ञानिक, शोधकर्ता, और औद्योगिक घरानों के साथ ही राज्य के विभिन्न जिलों से आए 200 पारंपरिक वैद्य, एक सौ औषधीय खेती करने वाले किसान और 50 व्यापारी भी परिचर्चा में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में किसानों के साथ कंपनियों का औषधीय पौधों की उपजों की खरीदी एवं विक्रय के लिए अनुबंध भी होंगे।
पुरातन काल से इलाज में काम आ रही औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के पारंपरिक ज्ञान का पुनर्जीवन और आधुनिकीकरण कर विकास की संभावनाएं इस परिचर्चा में तलाशी जाएंगी। इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान का अभिलेखीकरण, औषधीय पौधों का आधुनिक, वैज्ञानिक और व्यवसायिक तरीके से संरक्षण, संवर्धन, कृषिकरण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, बाजार आदि विषय पर आवश्यक चर्चा कर एक सार्थक और प्रभावशील हर्बल नीति बनाते हुए इसका कुशल क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा।
परिचर्चा के माध्यम से देश के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक, शोधकर्ता, पर्यावरण प्रेमी, प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों, नीति-निमार्ता, शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं के साथ हर्बल उत्पाद कंपनी तथा कुटीर उद्योग से जुड़े लोगों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों एवं पारंपरिक वैद्यों को एक मंच ‘वनौषधि-2018 छत्तीसगढ़’ पर एकत्र कर विचार-विमर्श उपरांत भविष्य की रणनीति बनाने एवं लागू करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, नई दिल्ली, बायोटेक्नोलॉजी विभाग नई दिल्ली, आईजीआईबी नई दिल्ली, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड नई दिल्ली और औषधीय पौधों में अनुसंधान करने वाले संस्थानों के वैज्ञानिक प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लगभग 200 पारंपरिक वैद्य, औषधीय पौधों की खेती करने वाले लगभग 100 किसान और औषधीय पौधों से जुड़े लगभग 50 व्यापारी सम्मिलित होंगे। साथ ही हर्बल उत्पाद निर्माण करने वाली देशभर की कंपनियों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे, जिनमें प्रमुख पतंजलि, हिमालया, डाबर, हिंदुस्तान यूनिलिवर, इमामी, पिरामिल, लिव्यूपिन, फ्लेमिंगों, पनैसिया बायोटेक, आर्गेनिक वेलनेस, बैद्यनाथ, झंडू, सन फार्मा, आईटीसी, साईं हेल्थ केयर, अजुर्ना, टोरेंट फार्मा, केरला आयुर्वेदा प्रमुख हैं।
वन मंत्री महेश गागड़ा, औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी.शर्मा उपाध्यक्ष, बोर्ड के सीईओ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक शिरीष चंद्र अग्रवाल, उद्योगों, वैद्यों, किसानों, व्यापारियों, संग्राहकों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।
dharmpath.com dharmpath