माकपा के संजय पराते, भाकपा के आरडीसीपी राव और भाकपा-माले-लिबरेशन के बृजेंद्र तिवारी ने कहा है, “1992 में सांप्रदायिक तत्वों की ओर से बाबरी मस्जिद के विध्वंस के रूप में इस देश के संविधान और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर सबसे बड़ा हमला किया गया था। आज ये ताकतें हिंदुत्व की राजनीति को और धारदार बनाकर सत्ता पर काबिज रहने के सपने देख रही हैं।”
उन्होंने कहा कि राम मंदिर विवाद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, फिर भी इसे आस्था का मामला बताकर उन्माद फैलाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा, “सांप्रदायिक राजनीति ने अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों पर करारा हमला किया है। गाय को केंद्र में रखकर सांप्रदायिक भीड़ को कानून हाथ में लेने की इजाजत दी जा रही है।”
तीनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा है, “पशुपालन करने वाले किसान परिवार इसके बर्बर शिकार हुए हैं। बुलंदशहर में हुई घटना बताती है कि इस आग की चपेट में वे पुलिस अधिकारी भी आ रहे हैं, जो जाति धर्म से ऊपर उठकर अपने कर्तव्यों का पालन करने और कानून-व्यवस्था की हिफाजत का काम कर रहे हैं।”
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