छत्तीसगढ़ का ‘रावण’ गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज

विजयादशमी के दिन राजधानी के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यह जानकारी राजधानीवासियों को दी। उन्होंने बताया कि डब्लूआरएस कालोनी के इस दशहरा उत्सव को देखने के लिए पूरे प्रदेश के कोने-कोने से लोगों का हुजूम जमा होता है।

प्रदेश सहित पूरी राजधानी की जनता ने 46 वर्षो से डब्ल्यूआरएस मैदान पर रावण दहन के साथ आयोजित की जाने वाली आतिशबाजी का आनंद तो लिया ही, लेकिन इस वर्ष पहली बार शहर के लोगों को संगीतमय आतिशबाजी का नजारा देखने को मिला। मैदान में चल रही आतिशबाजी ‘वंदे मातरम्’ की धुन पर थिरकती नजर आई। इस नजारे को देखकर शहर का हर शख्स रोमांचित हो उठा।

रावण दहन के लिए सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति ने शाम 7 बजे का समय तय किया था, लेकिन जब समिति पूरे विधि-विधान से रावण का दहन करती, उससे पहले ही आतिशबाजी की चिंगारी से रावण जल उठा।

आयोजन समिति के सत्यम दुआ ने बताया कि समिति ने रिमोट कंट्रोल से आतिशबाजी चलाने की व्यवस्था की थी। रावण का पुतला अपने आप जलने के बाद मेघनाद और कुंभकर्ण के 85-85 फीट के पुतले को ‘मैनुअली’ जलाया गया।

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