प्रदेश में पुलिस थाना तथा आवासीय भवनों के निर्माण का जिम्मा पुलिस हाउसिंग बोर्ड को दिया गया है। छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित जिले जशपुर में 4, सरगुजा में 4, सूरजपुर में 4, कोरिया में 4, बलरामपुर में 5, बस्तर में 6, कांकेर में 3, बीजापुर में 16, दंतेवाड़ा में 13, नारायणपुर में 4 और राजनांदगांव जिले में 12 थाना भवनों का निर्माण किया जाना था।
राज्य सरकार ने इसके लिए न केवल अपनी मंजूरी दी, बल्कि राशि भी मंजूर कर ली थी, परंतु इन 75 प्रस्तावित थाना भवनों के बदले केवल 9 थाने ही बन सके हैं और उनमें से भी केवल तीन थाना भवन पुलिस विभाग के सुपुर्द हो सके हैं। वैसे पुलिस विभाग का दावा है कि जल्दी ही अन्य थाना भवनों का निर्माण कर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, पुलिस हाउसिंग बोर्ड को 2013 में 82 थाना भवन बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस समय अनिल नवानी पुलिस महानिदेशक थे। इसके बाद से डीजीपी और पुलिस हाऊसिंग बोर्ड के प्रभारी लगातार बदलते रहे, पर थाना भवनों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
नक्सली क्षेत्रों में सुरक्षा के नाम पर हमेशा पुलिस फंड की कमी का रोना रोती रहती है, जबकि थाना भवनों के लिए तो पर्याप्त फंड भी राज्य शासन की तरफ से मुहैया करा दिया गया है।
सूत्रों की मानें तो अब पुलिस प्रशासन, पुलिस हाउसिंग बोर्ड की जगह निजी ठेकेदारों से थाना भवन बनवाने पर भी विचार कर रहा है।
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